सरकारी स्कूल में शिक्षक, साइंस लैब
लंबेसमयसे अध्यापकों की भारी कमी के चलते कलायत के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के छात्र स्कूल छोड़ने को मजबूर हैं। स्कूल का विज्ञान संकाय केवल एक ही अध्यापक के सहारे चल रहा है। स्कूल में तो अध्यापक हैं तथा ही कोई साइंस लैब है। खंड स्तर पर केवल कलायत का सरकारी स्कूल ही एकमात्र स्कूल है, जिसमें छात्रों के लिए कला, काॅमर्स के साथ विज्ञान संकाय भी एक विकल्प है। विज्ञान संकाय का हाल इतना बेहाल है कि विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए कोई प्राध्यापक ही नहीं है।
प्राध्यापक राजीव गुप्ता ने बताया कि प्राध्यापकों की लगातार चल रही कमी के कारण छात्रों का स्कूल से मोह भंग हो रहा है। विज्ञान संकाय में पिछले साल दोनों कक्षाओं में 50 से अधिक छात्र थे, जिनकी संख्या इस सत्र में घटकर केवल 21 रह गई है।
^इस बारे में पता किया जाएगा। छात्रों की सुविधा के अनुसार संभव व्यवस्था की जाएगी। डॉ.अशोक कुमार, डीईओ,कैथल
नहीं मिलती पूरी सुविधाएं
छात्रसुनील रमेश आदी का कहना था कि स्कूल में विज्ञान संकाय के प्राध्यापकों की कमी होने का खामियाजा छात्रों को उठाना पड़ रहा है। उनका कहना था कि स्कूल में तो प्राध्यापक हैं तथा ही कोई लैब है। उनका कहना था कि वे आखिर निजी स्कूलों के छात्रों को किस आधार पर कंपीट करें। छात्रों ने शिक्षा विभाग से मांग की कि उनके स्कूल में प्राध्यापकों की तत्काल प्रभाव से नियुक्ति की जाए ताकि बचे समय में वे अपने कोर्स तो पूरे पढ़ सकें। सरकारी स्कूलों से छात्र इसी लिए पलायन करने पर मजबूर है कि वहां पूरा आधारभूत ढांचा ही उपलब्ध नहीं है।
दो बार जीत चुका गोल्ड
स्कूलप्रिंसिपल डाॅ. कर्मवीर सिंह ने बताया कि उनके स्कूल में सभी स्ट्रीमों के करीब 600 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। स्कूल में छात्रों को शिक्षित करने के लिए अध्यापकों प्राध्यापकों के 31 पद सृजित हैं पर करीब एक तिहाई अध्यापकों की स्कूल में कमी है। विज्ञान विषय पढ़ाने के लिए फिजिक्स, बायलॉजी मैथ के अध्यापकों के अलावा काॅमर्स, हिंदी अंग्रेजी के प्राध्यापकों की भारी कमी है। पूरे विज्ञान संकाय में केवल रसायन शास्त्र का केवल एक ही प्राध्यापक है जो 6 से 12वीं तक की कक्षाओं को पढ़ाते हैं।