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डाइट का पार्क बन गया जंगल स्टूडेंट्स को डरा रहे घूमते सांप
इंस्टीट्यूट में चार फीट ऊंची गाजर घास झाड़ियों के कारण हालात बहुत बुरे
काम करने वालों को चेतावनी दी है
जिलाशिक्षाएवं प्रशिक्षण संस्थान ( डाईट) में पढ़ रहे विद्यार्थी चार माह से अपने ही परिसर में खड़े पेड़-पौधों के बारे में जानकारी लेने से वंचित हैं। डाईट परिसर में 10 माह से सफाई होने के कारण चार फीट ऊंची गाजर घास झाड़ियां खड़ी हैं। प्राध्यापक भी इस तरफ जाने से डर रहे हैं। हालांकि डाईट में छह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं। इनमें से तीन नियमित और तीन अनियमित कर्मचारी हैं। हर माह माली चपड़ासी पर 70 हजार रुपए वेतन के तौर पर खर्च हो रहा है। इसके बावजूद भी परिणाम जीरो है।
डाईट परिसर में 10 माह से सफाई नहीं हुई है। लंबे समय से सफाई होने के कारण डाईट परिसर के पीछे गाजर घास झाड़ियां खड़ी हैं। विद्यार्थियों को परिसर में सांप आने का भी भय बना रहता है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सफाई का काम एक दूसरे की जिम्मेदारी बता रहे हैं। इनमें से अधिकतर कर्मचारी मनमर्जी से काम कर रहे हैं। डाईट परिसर में 70 प्रकार के पौधे लगाए गए हैं। इनमें से 20 प्रकार के औषधीय पौधे हैं।
डाईट के विद्यार्थियों को इन पौधों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। लेकिन चार माह से विद्यार्थी इन पौधों को दूर से ही देखकर प्रेक्टिकल का काम चला रहे हैं। वे झाड़ियां और गाजर घास उगी होने के कारण इस जंगल में जाने से डर रहे हैं। इन पौधों में बेल पत्थर, ग्लोय, नीम, तुलसी, पुदीना, पत्थर चट, नसूड़ा, कड़ी पत्ता, जामुन, सुआंजणा, पपीता, पीपल, बड़, एलोवेरा, अमलतास जैसे कई पौधे हैं। छात्राओं का कहना है कि हम कई बार प्राचार्य को सफाई करवाने के लिए कह चुकी हैं। चारों तरफ ऊंची गाजर घास और झाड़ियां उगी होने के कारण हम पौधों के बारे में जानकारी भी नहीं ले पाती। ऐसे में प्रेक्टिकल पूरा होना भी मुश्किल है।
कैथल | डाईट परिसर में फैली घास झाड़ियां।
अपना काम करने के लिए समय ही नहीं मिलता : कुलदीप
माली कुलदीप का कहना है कि उन्हें चपड़ासी के स्थान पर काम करना पड़ता है। डाईट में प्राध्यापकों, प्राचार्य और कार्यालय में आए हुए लोगों को पानी पिलाने के बाद अगर कुछ समय बचता है। तो माली का काम करता हूं। हमने कुछ माह पहले डाईट परिसर की सफाई की थी। लेकिन गाजर घास उखाड़ने के बाद चमड़ी रोग की शिकायत हो गई थी। हाथ खराब होने