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सर्व पितृ अमावस्या-पितृ ऋण उतारने का दिन

7 वर्ष पहले
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शास्त्रोंमेंमनुष्य के तीन ऋण कहे गए हैं- देव ऋण, गुरु ऋण पितृ ऋण। इनमें से पितृ ऋण को श्राद्ध करके उतारना आवश्यक है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिन माता-पिता ने हमारी आयु, आरोग्यता और सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए अनेक प्रयास किए, उनके ऋण से मुक्त होने पर हमारा जन्म लेना निरर्थक होता है।

इसे उतारना आवश्यक होता है। गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के संचालक पं रामराज कौशिक के अनुसार श्राद्ध पक्ष में अमावस्या का बड़ा महत्व है। आश्विन मास की अमावस्या पितरों की शांति का सबसे अच्छा मुहूर्त है। जिन लोगों ने अपने पूर्वजों का तीन वर्ष तक श्राद्ध किया हो, उनके पितर पितृ योनि से वापस प्रेत योनि में जाते हैं। जिनके पितृ प्रेत योनी में भटक रहे है। उनकी पूर्ण मुक्ति और पितृ योनी में स्थान दिलवाने के लिए इस दिन का बड़ा महत्व है।

वैसे तो श्राद्ध के पूरे दिन ही उनकी मुक्ति और उनसे आशिस लेने के लिए पिंडदान, तर्पण करना चाहिए और शस्त्र द्वारा, विष द्वारा या अकाल मृत्यु, दुर्घटना आदि में अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए पूर्वजों का श्राद्ध त्रयोदशी या सर्वपित्र अमावस्या को उनकी शांति के लिए तीर्थस्थान में त्रिपिण्डी श्राद्ध किया जाता है।

आपकी कुंडली में तो नहीं पितृ शाप दोष,पितृ ऋण

हमारेज्योतिष शास्त्रों में अनेक जगह पितृ शाप दोष का वर्णन आता है पराशर होराशास्त्र, जातक पारिजात, प्रश्न मार्ग, जातक र| आदि ग्रंथों में पितर दोष एवं उसके होने वाले कुप्रभाव उनके शांति के उपाय भी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त इन ग्रंथों में जीवात्मा के जन्म के समय पितृ लोक से आने के और मृत्यु के पश्चात पितृ लोक में जाने के योग भी मिलते हैं। ज्योतिष में लग्न, द्वितीय, पंचम, षष्ठम, अष्टम, नवम, द्वादश भाव से पितृ दोष और बाधा का विचार किया जाता है। सूर्य चन्द्र गुरु शनि राहू और गुलिक से पितृ दोष का विचार किया जाता है। राहु शनि की युति, मंगल शनि, सूर्य राहु, चन्द्र केतु, गुरु राहु आदि की युति पितृ शाप को दर्शाती है। यदि ये योग विषम राशियों में हो तो पितृ दोष कारक पितृ पुरुष है यदि वह सम राशि में हो तो पितृ स्त्री है पितृ दोष कारक ग्रह यदि सूर्य है तो पिता आदि चन्द्र के होने पर माता आदि मंगल के होने पर भाई गुरु के होने पर अपना गुरु और पूर्वज आदि पितृ होते हैं

पितृदोष के लक्षण

अज्ञातरोग व् अज्ञात भय, मानसि