पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • दुबली पतली सेहत देख पापा कहते थे नौकरी मिलेगी, खेल में कोई स्थान

दुबली-पतली सेहत देख पापा कहते थे नौकरी मिलेगी, खेल में कोई स्थान

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बड़ाभाईपहलवानी करता था। खेल कोटे के तहत आर्मी में भर्ती हो गया। मेरी सेहत दुबली-पतली थी। जिसे देख आर्मी से रिटायर्ड पिता चंद्रभान कहा करते थे कि तो तुझे नौकरी मिलेगी और ही पहलवानी कर सकेगा। इसी ताने ने सख्त मेहनत करवानी शुरू कर दी और आज प्रदेश के लिए दो बार कुश्ती में गोल्ड हासिल कर चुका हूं। यह बात प्योदा निवासी पहलवान संदीप ने कही।

संदीप श्री गुरु गोबिंद सिंह खेल स्टेडियम पट्टी अफगान में आयोजित अखाड़ा प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए आया हुआ था। संदीप ने कहा कि बचपन में ताऊ और चाचा खेतों में ले जाते थे। वहां वे दूसरे बच्चों के साथ कुश्ती करवाते और हारने पर हौसला बढ़ाते। गांव में करीब 50 पहलवान हैं। कभी किसी ने जिला कुमार का खिताब नहीं जीता। वर्ष 2011 में जब जिला कुमार का खिताब जीतकर गांव में पहुंचा तो पापा को कहीं बात याद दिलाई तो पापा ने खुशी से छाती से लगा लिया। संदीप खेल सिस्टम से भी परेशान है। उसका कहना है कि कुश्ती के लिए जिले भर में एक ही कोच है। जबकि एक कोच सौ खिलाड़ियों को एक ही समय में कोचिंग नहीं दे सकता। उन्हें प्राइवेट तौर पर कोचिंग लेनी पड़ती है।

पहलवान संदीप।

दो बार जीत चुका गोल्ड

हरीसिंह अखाड़े के पहलवान संदीप ने 84 किलोभार वर्ग में जींद के नडियाली में आयोजित हरियाणा केसरी में गोल्ड हासिल किया। इसके अलावा झारखंड में आयोजित जूनियर मुकाबले में भी गोल्ड प्राप्त किया। संदीप ने दिल्ली में आयोजित नेशनल कुश्ती मुकाबले में हरियाणा की तरफ से हिस्सा लिया।