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- गए थे जन्नत देखने, दस दिन होटल से देखा तबाही का मंजर
गए थे जन्नत देखने, दस दिन होटल से देखा तबाही का मंजर
कैथल |रविवार को जम्मू कशमीर से लौटा परिवार
दोबारा नहीं जाएंगे कश्मीर
प्रवीणगुप्ता के बेटे शुभम बेटी चारू ने कहा कि दोबारा कभी भी जीवन में कश्मीर घूमने नहीं जाएंगे। वहां पर इतना पानी है कि आंखें फटी रह जाती हैं। हजारों लोग बाढ़ में बह गए हैं। अभी तक सभी जगह राहत नहीं पहुंची है। 13सितंबर को दोबारा मौसम खराब हो गया था और बारिश होने लगी थी। इससे पहले ही वे निकल आए।
आर्मी ही बचा रही देश को
प्रवीणगुप्ता ने बताया कि जम्मू-कश्मीर का लोकल प्रशासन कोई सहयोग नहीं कर रहा है। कोई नेता नजर रहा है। हरियाणा में लोकल प्रशासन बहुत सहयोग करता है। लेकिन वहां ऐसा नहीं है। आर्मी लोकल लोग सहयोग कर रहे हैं। आर्मी ही है जो अपने देश को बचा रही है। आर्मी हो तो देश तबाह हो सकता है।
भास्कर न्यूज | कैथल
कैथलकेपांच परिवार जन्नत देखने के लिए श्रीनगर गए थे। लेकिन वहां श्रीनगर घूमने का समय भी नहीं मिला। होटल से ही श्रीनगर की तबाही का लाइव देखा।
प्रवीण गुप्ता ने बताया कि कैथल के पांच परिवारों के 21 लोग चार सितंबर को घूमने के लिए श्रीनगर गए थे। उसी दिन से वहां पर बरसात शुरू हो गई। सात सितंबर तक लगातार बरसात होती रही। ज्यादा बरसात होने रात को बादल फटने से झेलम नदी डल झील सबकुछ एक हो गया। श्रीनगर में तीन मंजिल तक पानी था। लेकिन वे जिस स्थान पर ठहरे हुए थे वहां उस होटल में पानी नहीं आया। वहीं से उन्होंने तबाही का लाइव देखा। बिजली, पानी सहित सारी व्यवस्था ठप हो गई थी। आठ सितंबर को होटल वालों ने भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद लोकल लोगों ने सहयोग किया। गैस लाइन भी ठप हो गई थी। वहां के लोगों ने लकडिय़ां आटा दिया। होटल में लकडिय़ों पर ही खाना बनाया। एक आध बार चावल बनाए। ऐसे ही पांच दिन गुजारे। लोकल लोगों ने बहुत सहयोग किया। 13 सितंबर को सीआरपीएफ के जवान नाव लेकर पहुंचे। उन्होंने श्रीनगर के एयरपोर्ट पर छोड़ा। वहां से रात को दो बजे वायु सेना के जहाज से पठानकोट आए। पठानकोट से आज कैथल पहुंचे। कैथल रेलवे स्टेशन मास्टर रणधीर सिंह ने बताया कि इंटरनेट पर सूचना आई गई है। 16 सितंबर रात को ट्रेन आएगी।