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बुजुर्गों के मरणोपरांत प्रीतिभोज पर पाबंदी

7 वर्ष पहले
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ढुल खाप का फैसला

ढुलखापकी महापंचायत गांव शेरू खेड़ी में मंगलवार को आयोजित हुई। पंचायत में कई सामाजिक फैसले लिए गए, जिसका खाप के सभी सदस्य पालन करेंगे।

ढुल खाप प्रधान इंद्र सिंह हरसौला की अध्यक्षता में करीब पांच घंटे चली पंचायत में वक्ताओं ने सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की। खाप प्रधान इंद्र सिंह ने कहा कि बुजुर्गों के मरणोपरांत प्रीतिभोज का रिवाज काफी पुराना है। प्रीतिभोज (जग) में लाखों रुपए लग जाते हैं, जिसका कोई फायदा नहीं होता। इस परंपरा को बंद करने के बारे में सभी ने सहमति जताई। सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि ढुल खाप के 64 गांवों में मरणोपरांत प्रीतिभोज पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। इसके अलावा डीजेे पर पाबंदी लगाने का निर्णय भी लिया गया।

गांवों में विवाह खुशी के अन्य मौकों पर बैंडबाजा बजा सकते हैं, लेकिन डीजे पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। खाप ने दहेज लेने पर भी पाबंदी लगाई। जिस बहन के कोई भाई नहीं है। वह अपनी जमीन परिवार वालों को बेच सकती है। परिवार वाले उस जमीन को गांव में जो भी मार्केट रेट होगा, उसी हिसाब से खरीदेंगे। दबाव डालकर सस्ती जमीन नहीं खरीद सकते। गांव में जिस हिसाब से जमीन बिक रही है। लड़की को उसी रेट के हिसाब से पैसे दिए जाएंगे। इंद्र सिंह हरसौला ने कहा कि खाप एक जाति की नहीं है। गांव की 36 बिरादरी के लोग खाप के पदाधिकारी बन सकते हैं। खाप ने कोई भी गलत फैसला नहीं लिया है। सरकार कुछ संगठन खापों को बदनाम करते हैं। खाप लोगों के घरों को बसाने का काम करती है, कि उजाड़ने का।

जुलाना से विधायक परमिंदर सिंह ढुल ने कहा महाराजा हर्षवर्धन के समय ही खाप अस्तित्व में आई थी। उसी समय से खाप सामाजिक कार्य कर रही है। आजादी की लड़ाई में भी खापों का अहम योगदान रहा था और मौजूदा समय में भी खाप अहम भूमिका निभा रही हैं। सज्जन ढुल पाई, कैप्टन राजकुमार कंवर वीके सिंह ने कहा कि हमारी प्राचीन परंपरा को कायम रखना बहुत जरूरी है। इस पर ही समाज की नींव टिकी है। प्रत्येक व्यक्ति खाप पंचायतों मान-सम्मान करे। समय के साथ बदलें। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाएं। 21वीं सदी पढ़े-लिखे युवाओं की है।

इस अवसर पर दरियाव सिंह ढुल, नरसिंह ढुल, पूर्व एसडीएम मांगेराम, छज्जा सिंह पंजाब, बलबीर सिंह गांव देवली दिल्ली, सुभाष बड़सीकरी मौजूद थे।

हुक्के का आनंद उठाते पंचायत में उपस्थित सदस्य।

कैथल |गांव खे