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फीड बैक कार्यक्रम में महिला पंचों ने सरपंचों को सुनाई खरी-खरी
पंचायतभवनमें बुधवार को कैथल खंड के आठ गावों की पंचायतों को फीड बैक के लिए बुलाया गया। इस कार्यक्रम में पुरुषों के तुलना में महिलाओं की संख्या काफी अधिक रही।
सेगा के सरपंच अजमेर सिंह ने कहा कि सभी पंचों को साथ लेकर गांव का विकास किया जा रहा है। अगर किसी बात पर सहमति नहीं बनती तो बहुमत से सहमति बनाकर काम को पूरा करवाया जाता है। कठवाड़ की सरपंच किरणा देवी ने कहा कि सरपंच मैं हूं, लेकिन मेरा बेटा सरपंची का काम देखता है। गांव में किए जा रहे विकास कार्यों के बारे में पूरी जानकारी रखी जाती है। यहां तक कि पंचों को बुलाकर समय-समय पर बैठकें आयोजित की जाती है। गांव के विकास के लिए पंचों से सलाह भी ली जाती है।
सिसला के सरपंच सुभाष चंद ने कहा कि महिला पंच पंचायतों में सक्रिय नहीं हैं। वे चूल्हे चौके तक ही सीमित होकर रह गई हैं। अगर उन्हें बैठक में पहुंचने के लिए कहा जाता है, तो वे नहीं पहुंचती। इस पर सिसला की महिला पंच खड़ी हो गई। महिला पंच ने कहा कि हमें पंचायत में बुलाया ही नहीं जाता। अगर हमें पंचायत की बैठक की सूचना भेजी जाए तो वे अवश्य बैठक में शामिल होंगी। कठवाड़ की सरपंच किरणा देवी ने कहा कि तो उन्हें मीटिंगों के बारे में पता है और ही उन्हें पंचायत की बैठकों में बुलाया जाता है। सिसमौर के सरपंच होशियार सिंह ने बताया कि महिलाएं पंचायत में आने से शर्म महसूस करती हैं। वे पंचायत के कार्यों को चलाने में असक्षम हैं। इसी दौरान सिसमौर की कुछ पंच खड़ी हो गई। महिला पंच का कहना था कि उन्हें सूचित ही नहीं किया जाता। सिसमौर की पंच बतेरी ने कहा कि हम बहुमत से जीतकर ही पंच बनी हैं। इसके बावजूद पंचायत में उनकी अनदेखी की जा रही है। पंचायत की बैठक तो होती है। लेकिन पांच वर्षों में उन्हें कभी बैठक की सूचना नहीं दी जाती। पंचायत में महिलाओं की बिना भागेदारी से ही प्रस्ताव पारित कर दिए जाते हैं।
किसी भी पंचायत ने गठित नहीं की समितियां
कैथलमें सरपंचों पंचों द्वारा गांवों में पांच वर्ष के दौरान किए कार्यों की फीड बैक लेने पहुंचे प्रशिक्षक सुशील कुमार जांगड़ा ने बताया कि सरपंच पंचों को गांवों में उप समितियां गठित करनी होती है, लेकिन किसी भी पंचायत ने ऐसी उप समितियों का गठन नहीं किया है। इन उप समितियों में शिक्षा, सुख-सुविधा, सामाजिक न्याय समितियां शामिल होती हैं ताकि गांवों के युवाओं को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों के बारे में भी जानकारी हासिल हो सके। अधिकतर सरपंचों को अपने अधिकारों के बारे में भी जानकारी नहीं है।
इनपंचायतों ने फीड बैक कार्यक्रम में लिया हिस्सा
पंचायतभवन में पांच वर्ष के कार्यकाल को आधार बनाकर कैथल खंड की आठ पंचायतों ने बुधवार को फीड बैक दी। इन पंचायतों में बरोट, देवीगढ़, सिसला, सिसमौर, काकोत, सेगा, कठवाड़ दिवाल शामिल थे। पंचायत भवन में फीड बैक कार्यक्रम के दौरान पुरुषों की तुलना में महिला सरपंच पंचों की संख्या काफी अधिक रही।
कैथल |पंचायत भवन में पंच-सरपंचों द्वारा किए गए विकास कायों की फीड बैक लेते प्रशिक्षक।