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- 10618 करोड़ का बोगस वैट रिफंड मामला: शिकायतकर्ता ने कहा एसआईटी जांच में हुआ गोलमाल
10618 करोड़ का बोगस वैट रिफंड मामला: शिकायतकर्ता ने कहा एसआईटी जांच में हुआ गोलमाल
एक्साइजएंडटेक्सेशन डिपार्टमेंट के अफसरों ने राइस इंडस्ट्री, लोहा, बिल्डरों और सिगरेट जैसे बड़े व्यवसायियों को 10618 करोड़ रुपए के बोगस रिफंड कर दिए। इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को लोकायुक्त करेंगे। शिकायतकर्ताओं ने एसआईटी पर ही जांच में गड़बड़ी करने के आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि जांच में भी बड़ा गोलमाल किया गया है। एसआईटी सही जांच करती तो प्रदेश में 50 हजार करोड़ रुपए का घोटाला हो सकता है। एसआईटी ने जांच में कुछ अधिकारियों कर्मचारियों के खिलाफ साधारण मामला दर्ज करने के लिए लिखा गया है। जबकि मामला सेल टैक्स एक्ट में दर्ज होना चाहिए। मूल शिकायत में तरसेम , शिव, मुकेश मोंटू के नाम भी दिए गए थे। लेकिन एसआईटी ने इन फर्मों की कोई जांच नहीं की। जो ट्रांसपोर्टर्स टैक्स की चोरी करते हैं। आए दिन उनकी बात एक्साइज एंड टेक्सेशन डिपार्टमेंट के अफसरों से होती थी। जांच रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है। एसआईटी जांच में लेनदेन के सबूत भी मिले हैं। अधिकारियों मिलीभगत से ही टैक्स की चोरी हो रही है। तत्कालीन कैथल के डीईटीसी अनिल राव के समय एक हजार फाइलों पर वैट रिफंड किया गया है। जबकि जांच में 60 से 70 फाइलों के रिफंड का ही जिक्र किया गया है। कैथल में 18 करोड़ नहीं 300 करोड़ रुपए के बोगस वैट रिफंड किए गए हैं। हरियाणा में 53 ट्रांसपोर्टर्स हैं। उनके पास करीब 1100 वाहन हैं। लोकायुक्त के भय से एक अफसर ने तीन घंटे जीटी रोड पर चैकिंग की थी, तीन घंटे की चेकिंग में 69 लाख रुपए टैक्स की चोरी पकड़ी थी। जो माह में 22 करोड़ रुपए की चोरी बनती है। अब भी सभी शहरों में टैक्स की चोरी हो रही है। कहीं भी रोड साइड टैक्स की चोरी रोकने के लिए जांच नहीं की। एसआईटी में जो अधिकारी सही जांच कर रहे थे, उन्हें जांच से दूर रखा गया है। दो कर्मचारियों खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दे दिए। जबकि उनका मामले से कोई भी लेना देना नहीं था। कैथल में ही आए दिन लाखों रुपए की टैक्स चोरी हो रही है। सीमेंट सरिया वाले सबसे ज्यादा टैक्स चोरी कर रहे हैं। बावजूद इसके कोई चेकिंग नहीं हो रही है।
लोकायुक्त ने किया था एसआईटी का गठन
शिकायतकर्ताद्वारा बार-बार रिमाइंडर करवाने के बाद ही लोकायुक्त ने एसआईटी का गठन कर जांच की जिम्मेदारी आईपीएस श्रीकांत जाधव, डीएसपी सुरेंद्र भौरिया, डीएसपी करण गोयल, ईटीसी वीके शास्त्री, अमित भाटिया, ईटीओ जितेंद्र राघव को शामिल किया गया था। शिकायतकर्ता पर कई बार शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया, लेकिन शिकायत वापस नहीं ली। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने मामले की जल्द जांच करने के आदेश दिए थे। इसके बाद ही एसआईटी ने जांच शुरू की थी।
मुख्य आरोपी पर लगाया हुआ है ज्वाइंट कमिश्नर
शिकायतकर्तासतबीर किछाना ने कहा कि घोटाले के समय कैथल के डीईटीसी रहे अनिल राव को मौजूदा समय में फरीदाबाद में आबकारी एवं कराधान विभाग का ज्वाइंट कमिश्नर लगाया हुआ है। सरकार आए दिन भ्रष्टाचार को मिटाने की बात कर रही है। एसआईटी जांच रिपोर्ट में 10618 करोड़ का बोगस वैट रिफंड किए गए हैं। फरीदाबाद रेंज सबसे बड़ी है। ऐसे अधिकारियों को इतनी बड़ी रेंज में लगाकर कहां से भ्रष्टाचार रुकेगा। ऐसे अधिकारियों को बड़ी पोस्ट नहीं देनी चाहिए।
>एक दिन में प्रदेश में हो जाती है 69 लाख रुपए के टैक्स की चोरी >शिकायतकर्ता सतबीर किछाना का आरोप 50 हजार करोड़ रुपए का हुआ है घोटाला