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पहले रिकार्ड कीपर को दौड़ाया फिर कमरे में बना लिया बंधक
अपनीमांगोंको लेकर जिला वन विभाग के परिसर में धरना दे रहे वन विभाग मजदूर यूनियन के सदस्यों ने दोपहर को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के कमरे में एक कर्मचारी को बंधक बना लिया। आधा घंटे तक कर्मचारी को कमरे से बाहर नहीं निकलने दिया गया। मजदूर कमरे के बाहर डीएफओ के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।
वन विभाग कार्यालय में डीसी रेट पर नौकरी कर रहा प्रेम सिंह दोपहर को कार्यालय से कोर्ट केस की फाइलें लेकर निकला। वन मजदूर धरने से उठकर शोर मचाते हुए उसके पीछे भाग लिए। प्रेम सिंह ने रेंज अधिकारी कैथल अनिल श्योराण के कमरे में घुसकर अपना बचाव किया। कुछ देर बाद वन मजदूरों द्वारा कोर्ट केस की फाइलें छीनने के डर से प्रेम सिंह वापस डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के कमरे में आने लगा तो मजदूर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए उसके पीछे भाग लिए। डिप्टी सुपरिंटेंडेंट कमलेश रानी ने प्रेम सिंह का बचाव किया। कमलेश रानी ने कहा कि डीएफओ पंचकूला से आई टीम के साथ सरस्वती रेंज में चेकिंग के लिए गए हुए हैं। प्रेम सिंह बुजुर्ग कर्मचारी है। कार्यालय में बैठा प्रेम सिंह मजदूरों के डर से आधा घंटा कांपता रहा। उसने तुरंत फाइलें मेरे हवाले कर दी। मजदूरों को ऐसा नहीं करना चाहिए था। ऐसे में कुछ भी हो सकता था।
कार्यालय में कर्मचारी प्रेम सिंह के खिलाफ नारेबाजी करते वन विभाग मजदूर यूनियन के सदस्य।
जिला वन विभाग अधिकारी रामकुमार जांगड़ा ने बताया कि किसी भी कर्मचारी को बंधक बनाना गलत हैं। अगर मजदूरों को किसी प्रकार की शिकायत थी तो वे मुझे मिल सकते थे। यहां तक कि मजदूरों को उच्च अधिकारियों के पास मेरी शिकायत करने का भी अधिकार है। वन विभाग के डीसी रेट पर लगे कर्मचारी प्रेम सिंह से घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली जाएगी। इस पश्चात धरना दे रहे वन मजदूरों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए एसपी को लिखेंगे।
डीसी रेट पर लगे प्रेम सिंह ने बताया कि मैटरोल जलाने में मेरा कोई कसूर नहीं। वर्ष 2010 से पहले मैं दरोगा के पद पर था। कोर्ट केस की फाइलों का कार्य देखता था। पांच माह पहले मुझे डीसी रेट इसी कार्य पर फिर रखा गया है। जहां तक मैटरोल जलाने की बात है। इसमें मेरा कोई कसूर नहीं हर तीन वर्ष बाद वन विभाग के अधिकारी कमेटी गठित करके वन विभाग एक्ट 16.24 के तहत पुराने रिकार्ड को नष्ट कर देते हैं। मुझे बंधक बनाने के स्थान पर मजदूरों को जिला वन अधिकार