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बरसात से सर्दी बढ़ेगी, गेहूं की फसल में होगा ग्रोथ

7 वर्ष पहले
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सर्दीकीपहली बारीश फसलों के लिए संजीवनी है। इस सीजन में बरसात भी नहीं हुई थी। जिस कारण गेहूं ग्रोथ नहीं कर रही थी।

किसान महेंद्र, कल्याण, बीरेंद्र, सूखा सिंह महेंद्र ने कहा कि बरसात का सभी फसलों को फायदा हुआ है। गेहूं के लिए बरसात संजीवनी का काम करेगी। जितनी सर्दी पड़ेगी उतनी गेहूं की फसल ग्रोथ करेगी। उत्पादन भी ज्यादा होगा।

मंडीमें किसानों को हुई परेशानी : दोदिन से हो रही बूंदाबांदी के कारण मंडी में जीरी की बिक्री भी कम हो गई है।

मंडी में बाहर पड़ी धान भीग गई है। जो धान सड़कों पर पड़ी थी उसमें नीचे से पानी भी घुस गया है। बूंदाबांदी के कारण धान में नमी ज्यादा हो गई है। मौसम खराब होने के कारण धान की बोली भी बंद रही।

एकदमबदला पहनावा : सर्दीके इस सीजन में ठंड बहुत कम पड़ रही थी। इसलिए लोगों ने पहनावा भी नहीं बदला था। 13 दिसंबर को अलसुबह अचानक मौसम बदला और आकाश मेंं बादल छा गए। सुबह ही हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। सर्दी ज्यादा बढ़ने से लोगों का एकदम पहनावा भी बदल गया। बाजार गलियों में लोग अलाव जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते नजर आए। घरों और कार्यालयों में हिटर का इस्तेमाल शुरू हो गया है।

बासमतीका निर्यात खुलने का अनुमान: बासमतीनिर्यातक हरबंस, मनीष सिंगला और बबलू गर्ग ने बताया कि बासमती धान में मंदा आने कोई कारण नहीं है, क्योंकि मिल मालिकों ने बासमती धान के एडवांस सौदे किए हुए हैं और उन्हें अपना सौदा भुगतान के लिए किसी भी कीमत पर बासमती धान को लेना ही होगा। उन्होंने बताया कि जनवरी के तीसरे सप्ताह से ईरान में बासमती धान का निर्यात खुलने की उम्मीद है। निर्यात खुलने के बाद बासमती धान और 1121 धान में तेजी भी सकती है।

मौसम खराब के चलते बासमती धान बेचने में जुटे किसान

पूंडरी|बढ़नेकी उम्मीद लगाए बासमती धान को रोके बैठे किसानों ने उम्मीद छोड़ धान को मंडी में ले जाना शुरू कर दिया है। किसान लछमन दत्त, सेवासिंह, लखपत, रिसाल सिंह और मनीराम ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि बासमती धान 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक भाव बढ़ जाएंगे। उन्हें भय बना रहता है कि कभी उनका धान खराब हो जाए।

\\\"ओलावृष्टि से फसलों को हो सकता है नुकसान\\\'

शामको हुई बूंदाबांदी के साथ ओलावृष्टि भी हुई। दो तीन मिनट तक शहर में छोटे-छोटे ओले भी पड़े। ओले ज्यादा छोटे थे इसलिए जल्दी ही पिघल गए। कृषि विभ