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एक्सटेंशन लेक्चररों ने सरकारी उपेक्षा से खिन्न लिया मॉस लीव

5 वर्ष पहले
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डाॅ.भीमराव अंबेडकर कॉलेज में कार्यरत एक्सटेंशन लेक्चररों ने कार्य से मॉस लीव ली है। उन्होंने अपनी मांगों का एक ज्ञापन प्राचार्य ऋषिपाल बेदी को सौंपा। हरियाणा एक्सटेंशन लेक्चरर एसोसिएशन के प्रधान अमरजीत ने बताया कि पूरे प्रदेश में करीब 2500 लेक्चररों ने आज के दिन अपने काम से मॉस लीव ली है।

उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से कॉलेजों में शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। उनके काम बेहतर होने के बावजूद वे सभी सरकारी उपेक्षा का शिकार हैं। पूरी मेहनत करने के बाद भी उन्हें काम के हिसाब से उचित मानदेय नहीं दिया जा रहा है।

यह उनकी मेहनत गरिमा का अपमान है। उन्होंने वर्ष 2016 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने उच्चतर शिक्षा विभाग को आदेश दिया था कि एक्सटेंशन लेक्चरर को कम से कम 25 हजार रुपए मानदेय दिया जाए, लेकिन आज तक इन आदेशों को पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान विद्यार्थियों का जो नुकसान होगा, उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। इस अवसर पर सभी लेक्चरर मौजूद थे।

एसएफआईने किया समर्थन : स्टूडेंट्सफेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के राज्य उपप्रधान गौरव शर्मा, जिला प्रधान सुरजीत और सचिव मंजीत ने कहा कि प्रदेश के हजारों पढ़े लिखे नौजवान सरकारी महाविद्यालयों में एक्सटेंशन लेक्चरर के रूप में काम कर रहे है। जिन्हें उनके काम का पूरा मेहनताना भी नहीं दिया जाता।

एसएफआई उनकी मांग का समर्थन करती है। एसएफआई के नेताओं ने बताया कि प्रदेश में हजारों की संख्या में सरकारी महाविद्यालयों में अध्यापकों के पद खाली पड़े है।

जिन पर सरकार भर्ती नहीं कर रही। और पक्की भर्ती की जगह जिन नौजवानों को एक्सटेंशन लेक्चरर के रूप में लगाया गया है उन्हें पूरा मानदेय नहीं दिया जाता। जबकि वे सभी एक पक्के अध्यापक की तरह काम करते है और छात्र छात्राओं को पढ़ते हैं।

उनकी मांग की है कि कॉलेज कैडर अध्यापकों के खाली पड़े हजारों पदों को स्थायी रूप से भरा जाए।

तब तक एक्सटेंशन लेक्चरर के रूप में कार्य करने वाले अध्यापकों को हाइकोर्ट के निर्देशानुसार मानदेय दिया जाए और अन्य मांगें भी पूरी की जाए।

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