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बारिश से कपास गवार की फसल में नुकसान, िकसानों को सर्वे का इंतजार
क्षेत्र में पिछले सप्ताह हुई बारिश के कारण यूं तो सभी फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है कपास गुवार की फसल। फूल, पापड़ी टिंडों से लदे पौधे जमीन में गिर गए हैं।
इससे केवल टिंडे, फूल पापड़ी झड़ गए हैं बल्कि जमीन में गिरने से उनके गलने की भी आशंका है। एक ओर जहां किसान अपनी बर्बाद फसल को लेकर चिंतित है, वहीं कृषि विभाग ने अब तक किसानों की बर्बाद हुई फसलों का सर्वे करवाकर मुआवजा दिलवाने की दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाया है।
जलभराववाले स्थानों पर जड़ गलने की भी शिकायत: कृषिविभाग के अनुसार जिले में कपास का रकबा 10 हजार 275 हेक्टेयर है। इसमें से नारनौल ब्लॉक में मात्र 1155 हेक्टेयर एरिया है। शेष 9100 हेक्टेयर, महेंद्रगढ़ ब्लॉक का है। कम पानी की फसल होने के कारण महेंद्रगढ़ कनीना ब्लॉक में कपास का एरिया लगातार बढ़ता जा रहा है। पैदावार भी अच्छी मिल रही है। चालू सीजन में भी कपास की फसल काफी बेहतर स्थिति थी। लेकिन पिछले सप्ताह रुक रुककर हुई बारिश ने सारा खेल खराब कर दिया है।
जिले में कपास की खेती में किसानों ने जगाई संभावना
जिले में कपास की खेती को लेकर किसान जागरूक नहीं थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कृषि विभाग द्वारा चलाए गए अनेक किसान जागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से धीरे-धीरे जिले के लोग कपास की खेती करने लगे। कपास की खेती में पैदावार अच्छी होने से किसानों को आर्थिक रूप से ज्यादा लाभ मिलने लगा। विशेषकर कनीना महेंद्रगढ़ के किसानों ने भूजल स्तर काफी नीचे होने के बावजूद आधुनिक कृषि तकनीकियों का सहारा लेकर कपास की खेती करनी शुरू कर दी। आरंभ में कपास सिरसा, हिसार, अंबाला, करनाल, कुरुक्षेत्र जैसे तराई वाले क्षेत्र में अधिक होती थी। परंतु क्षेत्र के जागरूक किसानों ने महेंद्रगढ़ जिले में में भी कपास की अच्छी पैदावार कर साबित कर दिया कि मेहनत से कृषि के क्षेत्र में अधिक लाभ लिया जा सकता है।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
सुनिल,मोहित, जसवंत, संदीप, लाला राम, अनिल, रामकुमार, कुशवंत सिंह, रूपचन्द आर्य, प्रभातीलाल, रामकुमार, जयसिंह, ओपी बवाना आदि किसानों ने बताया कि कपास के टिंडे काले पड़ गए हैं और इसके साथ-साथ ग्वार की फसल भी काली दिखने लगी है। ग्वार के पेड़ काले पड़ने लगे हैं जिसके कारण किसानों के चेहरे पर रौनक की बजाय मायूसी छाई हुई है।
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