आरटीआई एक्ट की उड़ रही धज्जियां
ग्रामसभा की बैठक एवं उसकी कार्रवाई को लेकर मांगी गई सूचना में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। ग्राम सभा कब और किस एजेंडे को लेकर आयोजित की जाती है इस बारे में स्वयं सरपंच भी सही प्रकार से नहीं बता पा रहे हैं। कनीना उपमंडल के गांव पाथेड़ा वासी पवन कुमार ने बीते जुलाई माह में पाथेड़ा, धनौंदा, खेड़ी, तलवाना, मोहनपुर, भोजावास झगड़ोली गांव में आयोजित ग्राम सभाओं का ब्यौरा मांगा था।
जिला उपायुक्त कार्यालय की ओर से इस पत्र को डीआरडीए नारनौल भेज दिया गया। डीआरडीए कार्यालय की ओर से उक्त पत्र खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कनीना को रेफर कर दिया गया। जिस पर आज तक कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हो सकी है। जिससे एक्ट की धज्जियां उड़ रही हैं।
पवन कुमार ने कहा कि दो माह बाद भी उन्हें आरटीआई का जवाब नहीं मिल सका है। जिससे एक्ट की धज्जियां उड़ रही हैं। इस संदर्भ में खंड विकास अधिकारी कनीना की गैरहाजिरी में कार्यालय सहायक भगवत प्रसाद ने बताया कि सरपंचों की ग्राम सभा आयोजित करने संबंधी जानकारी कार्रवाई बुक में इंद्राज होती है, जिसे देखकर ये नहीं बताया जा सकता कि सभा की कार्रवाई घर पर बैठकर की गई है या सही तरीके से की गई है। उन्होंने कहा कि मांगी गई आरटीआई का जवाब शीघ्र ही वादी को दे दिया जाएगा।
साल में तीन ग्रामसभाएं करना जरूरी
ग्रामसचिव दिनेश कुमार के मुताबिक वर्ष में तीन ग्राम सभाएं करना जरूरी है, जिनकी 27 फरवरी, 27 मई तथा 27 नवंबर की तिथि निर्धारित की गई है इसके अलावा दो सभाएं मनरेगा की होती हैं, जिनमें एक महात्मा गांधी जयंती के दिन 2 अक्टूबर तथा दूसरी सुविधा अनुसार आयोजित की जाती है। किसी विशेष परिस्थितियों में विशेष ग्राम सभा बुलाई जा सकती है। जिसमें ग्रामीणों की हिस्सेदारी अनिवार्य है। पवन कुमार ने बताया कि कागजों में उक्त सभाएं हो रही हैं धरातल पर किसी प्रकार की सभा शायद ही आयोजित की जाती हो। पंचायत विभाग के अधिकारियों द्वारा आंखें मूंदकर बैठने से ऐसा करने से पंचायती राज अधिनियम का मजाक उड़ रहा है।
ग्राम सभा का महत्त्व
गांवके विकास कार्यों की योजना बनाने, पंचायत में आय व्यय का ब्यौरा देने के अलावा तमाम ऐसे कार्यों को सभा में रखा जाता है जो जनहित से जुड़े हुए हों। ग्राम सभा का आयोजन पंचायत भवन अथवा किसी भी सार्वजनिक स्थान पर होना चाहिए जहां सभी व्यक्ति हिस्सा ले सकें