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पांच महिलाओं ने लड़ा चुनाव, एक को सफलता

7 वर्ष पहले
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पंजाबसे अलग होकर अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आने से लेकर अब तक पहले रोहट अब खरखौदा से कुल 6 महिलाएं चुनाव लड़ चुकी है, जिनमें पूर्व मंत्री कृष्णा गहलावत हविपा पार्टी के टिकट पर जीतकर मंत्री बनी और कांग्रेस के टिकट पर उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

हरियाणा बनने के बाद वर्ष 1967 में हुए चुनाव में चंद्रावती पहली महिला थी जिसने खरखौदा के विधानसभा चुनाव में आरक्षित सीट पर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा, जिसमें वह हार गई थी। इसके बाद वर्ष 1972 में कांग्रेस पार्टी ने शांति देवी को यहां से अपना प्रत्याशी बनाया लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। वर्ष रिजर्व से सामान्य हलका होने के बाद वर्ष 1982 में कांग्रेस पार्टी ने शांति देवी को टिकट दिया लेकिन वे भी विजेता बन सकी। इसी दौरान महिला महेंद्र कौर ने निर्दलीय चुनाव लड़ा लेकिन वे भी हारी।

वर्ष 1996 में हरियाणा विकास पार्टी ने महिला पर दांव खेला यहां कृष्णा गहलावत जीत गई और उन्हें मंत्री बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2005 में कृष्णा गहलावत ने कांग्रेस पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा लेकिन उन्हें यहां पर दौबारा सफलता नहीं मिल सकी। पार्टी के बनने से अब तक इनेलो ने यहां पर पहली बार महिला प्रत्याशी को टिकट थमाया है। पिछले 24 वर्षों में यहां पर इनेलो केवल एक बार जीत दर्ज करा पाई है। जिसमें वर्ष 2000 में पदम सिंह दहिया ने चुनाव जीता था। उनके पहले वर्ष 1987 में लोकदल के प्रत्याशी ने चुनाव जीता था।

वर्ष 1967, 1977, 1987, 1991,2000 वर्ष 2009 में किसी भी महिला ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकन नहीं किया। लेकिन इस बार यहां से रिकार्ड टूट सकता है और अब तक के हुए चुनाव में सबसे महिलाओं की संख्या रिकार्ड हो सकती है।

अबतक की महिला प्रत्याशी : किसे कितने वोट मिले

वर्ष1967 में निर्दलीय पहली महिला प्रत्याशी चंद्रावती को 253 वोट मिले, वर्ष 1972 में कांग्रेस से प्रत्याशी शांति देवी को 10419 वोट मिले थे, वर्ष 1982 में कांग्रेस की टिकट से शांति देवी को 17971 वोट मिले, इसी चुनावी में निर्दलीय प्रत्याशी महेंद्र कौर को 307 वोट मिले, वर्ष 1996 में हविपा पार्टी से कृष्णा गहलावत जीती और उन्हें 23799 वोट मिले, जबकि वर्ष 2000 में हुए चुनाव में वे कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ी और उन्हें 14060 वोट मिले।