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पानी निकासी पर खर्च हुई करोड़ों की राशि की होगी जांच

7 वर्ष पहले
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पानीनिकासी के नाम पर खरखौदा में करोड़ों रुपए की राशि खर्च हुई है, लेकिन इसका फायदा शहरवासियों को नहीं मिला है। काम अधिकारियों ठेकेदारों की कमी के कारण कई स्थानों पर अधूरा पड़ा हुआ है। जिस कारण स्वच्छता अभियान फेल हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी ग्रांट खर्च के बावजूद सुविधा नहीं मिल रही है।

कई स्थानों पर लाखों रुपए खर्च कर पानी निकासी के नालों को अधूरा छोड़ दिया गया है तो कहीं 24 फीट चौड़ी ड्रेन को हाई प्रोफाइल लोगों की शह पर मात्र चार फीट चौड़े नाले में तबदील कर दिया है, यही नहीं इस पर करीब एक करोड़ रुपए खर्च भी किए गए। मटिंडू मार्ग पर नालों को अधूरा क्यों छोड़ा गया, पुराने रोहतक मार्ग पर ऊंचे नाले क्यों बनाए गए? ब्राह्मण मोहल्ले में क्यों एक तरफ ही दो नाले बना एक गली में तीन नाले किए गए? सीवरेज सिस्टम पर भारी खर्च होने के बाद भी व्यवस्था क्यों नहीं हो पाई? इन सब कार्यों में किन ठेकेदारों अधिकारियों ने अपनी शक्ति का गलत प्रयोग किया है। इसकी भी जांच कराई जानी है।

वार्ड पार्षद वार्ड वासियों ने की ड्रेन की जमीन पर गली बनने की मांग वार्ड पार्षद हीरा लाल के नेतृत्व में वार्ड वासियों ने नपा के खिलाफ मोर्चा खोला है। मांग की है कि एक तो ड्रेन की चौड़ाई कम की गई, ऊपर से बची हुई जमीन को कब्जे के लिए छोड़ दिया। उन्होंने मांग की है कि जल्दी ड्रेन की बची हुई जमीन पर गली बनाई जाए टाइलें लगाई जाएं, ताकि इस बची हुई जमीन कब्जा होने से बचाई जा सके। वार्ड वासियों को सुविधा मिल सके। वार्ड वासियों का कहना है कि जल्द ही इस बारे में कार्रवाई नहीं की गई तो वे जिला उपायुक्त से भी मिलेंगे।

^ खरखौदा का जल्द ही दौरा किया जाएगा जिन अधिकारियों ठेकेदारों ने सरकारी ग्रांट का दुरुपयोग किया है और काम अधूरे छोड़े हैं, उसकी जांच कराई जाएगी। पानी निकासी के कार्यों की जांच में गड़बड़ी मिली तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जो काम ठेकेदारो की लापरवाही से अधूरे पड़े हैँ उन्हें तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए। पानी निकासी की पुख्ता व्यवस्था करें। सरकारी ग्रांट का दुरुपयोग हुआ मिला तो अधिकारियों को भी जवाब देना होगा।\\\'\\\' राजीवरतन, डीसी,सोनीपत।

^ जिन ठेकेदारोंं ने काम अधूरा छोड़ा हुआ है, उनको नोटिस दिए हुए हैं, उनके टेंडर रद्द किए जाएंगे। पानी निकासी के लिए