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संस्कृत भाषा का महत्व के साथ गहराई से अध्ययन करें : प्रोफेसर आशा
कन्याकॉलेज में शनिवार को श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आयोजित प्रतियोगिता में जहां कॉलेज की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं डॉ. गीता शर्मा ने मंच संचालन किया।
इस अवसर पर निर्णायक की भूमिका निभा रही प्रोफेसर अल्का गुलाटी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत संस्कारों की जननी है। संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा है बल्कि संसार की सभी भाषाओं में श्रेष्ठ भाषा भी है।
इस अवसर पर प्रोफेसर आशा ने कहा कि छात्राओं को चाहिए कि वे अन्य भाषाओं के साथ ही संस्कृत भाषा को भी केवल महत्व दें बल्कि इस भाषा का गहराई से अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा हमारे अंदर संस्कार पैदा करती है। इस अवसर पर आयोजित श्लोक उच्चारण प्रतियोगिता में पूजा ने पहला,रेखा ने दूसरा प्रियंका ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसके साथ ही इस अवसर पर करवाई गई भाषण प्रतियोगिता में ममता ने प्रथम मौसम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
सोनीपत | स्कूलीशिक्षा अब आसान नहीं रही। विद्यार्थियों को अब पढ़ाने के लिए तैयार करना उन्हें पढ़ाने से कहीं अधिक मुश्किल हाे गया है। ऐसे में शिक्षकों के लिए जरूरी होगा कि वे बच्चों को उन्हीं की रूचि के अंदाज में पढ़ाए। पढ़ाना जरूरी है, क्योंकि वे ही देश का भविष्य है, इसलिए उन्हें पढ़ने की अादत डाली जाए। यह कहना है देश भर के स्कूलों में टीचिंग मैथेड समझाने वाली सपना अग्रवाल का। यहां ऋषिकुल विद्यापीठ स्कूल में आयोजित टीचर वर्कशाप में सोनीपत, रोहतक, पानीपत एवं भिवानी के शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने शिक्षकों को टीचिंग संबंधित कई गुर सिखाए। इस मौके पर विभिन्न स्कूलों से आए शिक्षकों एवं प्रिंसिपल एवं निदेशकों को भी सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में स्कूल संस्थापक एसके शर्मा, प्रिंसिपल पीआर मोहनन,नेक्स्ट एजुकेशन कंपनी की ओर से दिनेश शकारिया, अमित कुमार, नीरज झा आदि उपस्थित थे।
इसप्रकार खुद में करना होगा बदलाव : शिक्षकोंसे सपना अग्रवाल ने कहा कि शिक्षकों को परंपरागत शिक्षण पद्धति से पहले खुद को बाहर लाना होगा। माडर्न तकनीक से खुद को जोड़ना होगा। अगर उसे कंप्यूटर का शौक है तो कंप्यूटर में पढ़ाई डालनी होगी, खेलों का शौक है उन्हें खेलने के अंदाज में पढ़ाना होगा। यहां तक कि तोड़ने फोड़ने से लेेकर वीडियो गेम एवं मोबाइल यूजर शौकीन बच्चों को भी उन्हीं