2 डॉक्टरों के सहारे 9 करोड़ का हॉस्पिटल
नौकरोड़ रुपए की राशि खर्च करने के बाद भी खरखौदा अस्पताल में मरीजों को आधुनिक सुविधाएं तो मिलना दूर की बात है, जो सुविधाएं पुराने अस्पताल में थीं वे भी घट गई हैं। मौजूदा हालात ये हैं कि 9 करोड़ रुपए की राशि से बने अस्पताल में केवल दो चिकित्सक हैं, जिनमें से एक पर प्रशासनिक कार्यों का भी जिम्मा है। ऐसे में मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। कागजों तक ही आधुनिक अस्पताल की सुविधाएं सीमित रह गई हैं।
आधा-अधूराअस्पताल हुआ हैंड ओवर: सोचनेकी बात तो ये है कि निर्माणाधीन आधे-अधूरे अस्पताल को हैंड ओवर करते समय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आपत्ति दर्ज क्यों नहीं कराई। क्यों आधे-अधूरे अस्पताल का उद्घाटन कराया गया? लोगों का कहना है कि आदर्श आचार संहिता के डर के कारण ही आधे-अधूरे अस्पताल का उद्घाटन किया गया है।
खिड़की पर शीशे नलों में पानी नहीं
मौजूदा हाल में नौ करोड़ रुपए के अस्पताल की खिड़कियों पर शीशे भी नहीं लगे हैं, और ही सभी नलों में विधिवत पानी रहा है। ऐसे में स्टॉफ को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन प्रशासन का इस दिशा में कोई ध्यान नहीं है।
एक्सरेकराने के लिए भी करना पड़ता है रैफर: करोड़ोंरुपए की राशि खर्च करने के बाद भी एक्सरे की सुविधाएं सीएम द्वारा भवन के उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हो पाई हैं, अब एक्सरे कराने के लिए मरीजों को सोनीपत रैफर करना पड़ रहा है। जिससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
खरखौदा. चिकित्सकके कमरे में रखा एक बैट्री का इनवर्टर।
^ अस्पताल अभी पूरी तरह से शिफ्ट नहीं हुआ है, हाल में केवल एक बैट्री इनवर्टर के सहारे अस्पताल चला हुआ है, आवास की व्यवस्था नहीं है, खिड़कियों पर शीशे नहीं है, पानी का भी अभाव है। आधा अधूरा अस्पताल हैंड ओवर होने के कारण दिक्कतें हैं। केवल दो चिकित्सकों को रोजाना 550 मरीजों का इलाज करना पड़ता है। यहां पर ओर चिकित्सक लगाए जाने चाहिए ताकि मरीजों के सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।\\\'\\\' नितिनफलसवाल, चिकित्सकसामान्य अस्पताल खरखौदा।
चिकित्सकों की परेशानी
रोजाना करीब 550 की ओपीडी होती है। इतनी मरीजों के चैकअप के लिए मानकों के मुताबिक करीब पांच चिकित्सकों की आवश्यकता होती है, लेकिन खरखौदा के इस बड़े अस्पताल में केवल एक चिकित्सक को इलाज करना पड़ रहा है। जबकि दूसरे चिकित्सक पर विभिन्न तरह की जिम्मेवारी होने क