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- यहां पर पूजा करने से दूर होते हैं कष्ट इसीलिए आते हैं दूसरे राज्यों से श्रद्धालु
यहां पर पूजा करने से दूर होते हैं कष्ट इसीलिए आते हैं दूसरे राज्यों से श्रद्धालु
यमुनानदीके तट पर स्थित श्रीकालेश्वर महादेव मठ सर्व धर्म स्वभाव की शिक्षा देता है। सभी धर्म, संप्रदाय, मत मतांत्र के मानने वाले श्रद्धालु हर रोज यहां पर श्रद्धाभाव से शीश नवाने आते हैं। मठ द्वारा एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल का संचालन भी किया जा रहा है। जिसमें आसपास के गांवों के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। मठ की ओर से तैयार शिव अमृत जो विभिन्न रोगों में कारगर औषधि बताई जाती है, रोगियों को दी जाती है। प्रत्येक रविवार को मंदिर यज्ञशाला में मानव कल्याण के लिए हवन किया जाता है।
जिला मुख्यालय से 45 किमी दूर हरियाणा के प्रवेश द्वार पर शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में बना श्रीकालेश्वर महादेव मठ तेजी के साथ ख्याति अर्जित कर रहा है। दूर-दूर से श्रद्धालु प्रतिदिन कलेसर पहुंच भगवान शिव पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर में खड़ा सैकड़ों वर्ष पुराना विशाल वट वृक्ष मंदिर की प्राचीनता की गवाही दे रहा है।
स्वयंभू शिवलिंग है यहां पर : मठके महंत स्वामी शांता नंद ने बताया कि शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग अति प्राचीन तथा स्वयं प्रकट हुआ शिवलिंग है। श्रद्धाभाव से मंदिर में की गई पूजा अर्चना सदा फलदायी होती है। भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।
नवग्रह है मंदिर : कालेश्वरमठ परिसर में नव ग्रह मंदिर की स्थापना की गई है। मान्यता है कि एक साथ नव ग्रह पूजा से मानसिक शारीरिक कष्ट दूर होते है। जीवन में सुख समृद्धि आती है।
विशाललंगर हाल : कालेश्वरमठ कमेटी दानी सज्जनों के प्रयास से लंगर हाल बनाया गया है। स्वामी शांता नंद ने बताया कि बेसमेंट का काम पूरा हो चुका है। लंगर हाल 50 लाख की लागत से तैयार किया जा रहा है। हाल में 500 श्रद्धालु एक साथ बैठ कर भोजन ग्रहण कर सकते हैं। मंदिर कमेटी द्वारा गोशाला का संचालन किया जाता है। मंदिर में होने वाले हवन यज्ञ तथा पूजा अर्चना में गाय का देसी घी इस्तेमाल किया जाता है। शिवरात्रि के अवसर पर विशाल भंडार का आयोजन होगा।
खिजराबाद. कलेश्वरमठ का दृश्य।