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1170 में मात्र 526 ही पहुंचे टेस्ट देने

6 वर्ष पहले
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दिल्लीरोड स्थित राव तुलाराम स्टेडियम में चल रहे स्पीड टेस्ट के दूसरे दिन खोल खंड के खिलाड़ियों ने स्कॉलरशिप के लिए जोर आजमाइश की। खिलाड़ियों ने दमखम दिखाते हुए अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। हालांकि जितने खिलाड़ियों ने टेस्ट के लिए रजिस्ट्रेशन कराए थे उनमें से 50 प्रतिशत भी मैदान में नहीं पहुंचे।

बुधवार को खंड के 1170 खिलाड़ियों को पहुंचना था, जिनमें से 526 खिलाड़ी पहुंचे। इसमें 94 लड़कियों 432 लड़कों ने प्रतिभागिता की। इस दौरान खिलाड़ियों का 30 मीटर फ्लाइंग रन, स्टैंडिंग ब्रॉड जंप, मेडिसन बॉल, 6 गुणा 10 मीटर शटल रन, फॉरवर्ड बैंड एंड रिच तथा 800 मीटर दौड़ में टेस्ट लिया गया।

डॉक्यूमेंटजांच में हो रही मशक्कत

टेस्टके दौरान स्कूलों की ओर से खिलाड़ियों के डॉक्यूमेंट्स को लेकर लापरवाही भी सामने आई। इस कारण टेस्ट में प्रतिभागिता करने पहुंचे खिलाड़ियों के डॉक्युमेंट्स जांच में प्रशिक्षकों को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। डॉक्यूमेंट की जांच के कारण ही टेस्ट भी कई घंटे लेट शुरू हो पा रहे हैं। मंगलवार को भी डॉक्यूमेंट जांच प्रक्रिया के कारण दोपहर 12 बजे ही टेस्ट शुरू हो पाए। वहीं डॉक्यूमेंट के बिना पहुंचे करीब 15 खिलाड़ियों को बिना टेस्ट दिए ही वापस लौटना पड़ा।अधिकारियों का कहना है कि खिलाड़ियों के साथ आने वाले स्कूल इंचार्ज बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र आदि डॉक्यूमेंट की जांच कर के ही लाएं। जन्म प्रमाण पत्र बिना खिलाड़ी प्रतिभागिता नहीं कर सकता।

आज होंगे रेवाड़ी ब्लॉक के टेस्ट

जिलाखेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी रमेश जांगड़ा ने बताया कि अब 11 12 फरवरी को तुलाराम स्टेडियम में ही रेवाड़ी ब्लॉक के खिलाड़ियों के टेस्ट आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 13 फरवरी को कोसली के राजीव गांधी खेल परिसर में नाहड ब्लॉक के टेस्ट होंगे। जांगड़ा ने कहा कि हर बच्चा अपने साथ प्रमाण के लिए आधार कार्ड या स्कूल के विड्रॉल रजिस्टर कॉपी अवश्य लेकर आए, ताकि मैदान में टेस्ट देने से पहले किसी तरह का तकनीकी मुद्दा आए।

रेवाड़ी. मेडीसनबॉल का टेस्ट देती प्रतिभागी ललिता।

30मीटर फ्लाइंग रेस का टेस्ट देती प्रतिभागी वर्षा।

फारवर्ड बैंड एंड रीच टेस्ट देती पूजा।

स्टेडिंग ब्राड जंप का टेस्ट देता प्रतिभागी विनय।

नॉलेज : इसलिए दी जाती है स्कॉलरशिप

स्पीडयोजना के तहत खिलाड़ियों के टेस्ट लेकर ये देखा जाता है कि किस बच्चे में उम्दा खिलाड़ी बनने की क्षमता है। टेस्ट से उन खिलाड़ियों को चयनित किया जाता है, जिनमें भविष्य में अच्छा खिलाड़ी बनने तथा राज्य, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक नाम रोशन करने की संभावनाएं होती हैं। चयनित खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप इसलिए दी जाती है, ताकि कोई अच्छा खिलाड़ी गरीब परिवार से होने की स्थिति में आर्थिक मदद के अभाव में खेलों का अभ्यास ना छोड़े। स्कॉलरशिप राशि को अपने आप को निखारने में खर्च कर अपनी खेल प्रतिभा को निखार सके। सीधे कहें तो यह खिलाड़ियों की नर्सरी तैयार करने वाली स्कीम है।

जन्म प्रमाण पत्र बिना आए 15 खिलाड़ी बिना टेस्ट दिए लौटे वापस