पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बाजार के बीच से रेहड़ी और फड़ी वालों को हटवाया

बाजार के बीच से रेहड़ी और फड़ी वालों को हटवाया

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इधर, जाम लगाने वालों ने मांगी माफी

>कुछ लोग अभी भी बेपरवाह नजर आए

भास्करन्यूज|लाडवा

नगरपालिकाकी टीम ने दूसरे दिन मंगलवार को भी मुख्य बाजार से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी रखी। सफाई दरोगा ऋषिपाल जातिराम की देखरेख में टीम ने बाजार में केवल बाहर रखे सामान को हटवाने का काम किया, बल्कि रेहड़ी-फड़ियों को भी हटवाया। टीम को देखते ही रेहड़ी-फड़ी वाले जहां अपना सामान इकट्ठा कर यहां-वहां भागते नजर आए, वहीं दुकानदार भी अपना सामान समेट दुकानों के अंदर रखने लगे। वहीं कुछ लोग अभी भी बेपरवाह नजर आए।

अग्रसेन चौक पर अतिक्रमण हटाने के कारण पूरे दिन कोई भी जाम नहीं लगा। इसके अलावा अग्रसेन चौक से आठवाड़िया वाले मंदिर तक भी स्थिति ठीक बनी रही, लेकिन इसके आगे स्थिति में अभी भी कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। इसके अलावा संगम मार्केट, सराफा मार्केट में भी बेपरवाह दुकानदारों ने सामान बाहर सड़क पर रखा हुआ था। अतिक्रमण हटाने आई टीम ज्यों ही अपनी कार्रवाई पूरी कर बाजार से वापस गई, तुरंत ही टीम को देख इधर-उधर अपने सामान के साथ छुपने वाले रेहड़ी-फड़ी वाले मेन बाजार में दमके और फिर से सड़कों के बीचो बीच रेहडिय़ां फड़ियां लगा ली। केवल रेहड़ी-फड़ी वाले, बल्कि कई दुकानदारों ने भी टीम के जाते ही अपना सामान दुकान के बाहर सड़क पर रख दिया।

लाडवा|अतिक्रमण हटानेका विरोध कर अग्रसेन चौक पर जाम लगाने वाले रेहड़ी-फड़ी वालों को उस समय भारी पड़ गया, जब पुलिस ने इनमें से लगभग डेढ़ दर्जन प्रदर्शनकारियों को पकड़ कर थाने में बैठा लिया। रेहड़ी-फड़ी वालों ने सोमवार शाम को एसके रोड पर स्थित अग्रसेन चौक पर जाम लगाकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की थी। जाम लगने से मुसाफिर जाम में फंसे रहे और उनको भारी परेशानी झेलनी पड़ी थी। नगर पालिका टीम के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का विरोध कर रहे इन लोगों ने कर्मचारियों को खूब गालियां भी निकाली थी। थाना प्रभारी छोटे लाल ने इनको समझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन इनके तेवर बढ़ते ही चले गए। इस पर पहले पुलिस टीम ने इनको बातचीत कर मसला हल कराने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया और फिर थाने में बुलाकर थाने का मुख्य द्वार बंद कर लिया। इनमें से भी जो लोग विरोध कर रहे थे, उनको जेल में बैठा लिया। ज्यों-ज्यों अंधेरा होता गया और ठंड बढ़ती गई तो जाम लगाने वालों के तेवर भी ठंडे पड़ते चले गए