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लाडवा| प्रदेशसरकार ने जब से बुढ़ापा पेंशन बैंकों के माध्यम

7 वर्ष पहले
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लाडवा| प्रदेशसरकार ने जब से बुढ़ापा पेंशन बैंकों के माध्यम से देने की घोषणा की है तभी से बुजुर्ग टेंशन में हैं। खासकर गांवों में रहने वाले बुजुर्गों तो इस घोषणा के बाद से परेशान हैं। बुजुर्गों को तो एटीएम चलाने आते हैं और ही कई गांवों में बैंक हैं। ऐसे में अब उन्हें पेंशन के पैसे लेना भी मुश्किल दिख रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि पेंशन लेने के लिए वह घंटों बैंक में लाइनों में खड़े नहीं रह सकते हैं। पूर्व पार्षद कैलाश बंसल का कहना है कि सरकार का यह फैसला बुजुर्गों के लिए टेंशन से भरा है। उन्होंने कहा कि इससे बुजुर्गों को परेशानी के अलावा कुछ हासिल होने वाला नहीं है। वहीं वरिष्ठ नागरिक संगठन के प्रधान सतपाल गुप्ता ने कहा कि सरकार को खातों की जांच करनी चाहिए और आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर जांच करके उन लोगों की पेंशन बंद भी करनी चाहिए जो लोग गलत पेंशन ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैंक से पेंशन देने से दिक्कतें पैदा होंगी। सलेमपुर गांव के पूर्व सरपंच गौतम दत्त शर्मा ने कहा कि गांवों के बुजुर्गों के लिए तो यह फैसला मुसीबतों से भरा है। उन्होंने कहा कि बहुत से बुजुर्ग तो ऐसे हैं जो चल-फिर भी नहीं सकते हैं। इनको फिलहाल गांवों में सरपंच अधिकारी उनके घर ही जाकर पेंशन देते हैं। ऐसे में बैंकों से पेंशन मिलने से ये लोग पेंशन लेने नहीं पहुंच पाएंगे। वहीं ज्ञान सिंह बराहन ने कहा कि अगर सरकार को बैंकों से ही बुढ़ापा पेंशन वितरण करनी है तो पहले हर गांव में बैंक या एटीएम खोलने का काम करे। उन्होंने कहा कि बैंकों से केवल बुजुर्गों को पेंशन लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा बल्कि आए दिन उनके साथ धोखाधड़ी करने के मामले भी बढ़ जाएंगे। भालड़ गांव के रहने वाले आढ़ती गजे सिंह ने कहा कि इससे बैंकों में भीड़ और बुजुर्गों को परेशानी के अलावा कुछ हासिल होने वाला नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह ऐसा काम करें कि बुजुर्गों को उनके घर ही पेंशन मिल सके कि पेंशन के लिए उनको धक्के खाने पड़ें।