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खुद को पहचाने बिना नहीं मिलते भगवान : शास्त्री

7 वर्ष पहले
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शिवाला रामकुंडी परिसर में श्रीमद भागवत कथा

भास्करन्यूज|लाडवा

शिवालारामकुंडीपरिसर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा में आचार्य शैलेंद्र शास्त्री ने कहा कि जिस मनुष्य ने खुद को पहचान लिया, समझो उसने भागवत ज्ञान हासिल कर लिया। उन्होंने कहा कि खुद की पहचान किए बिना मनुष्य कभी भी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान से बड़ा उनका नाम है और जो भी व्यक्ति सच्चे मन से उनके नाम का जाप करता है, भगवान सबकुछ भूलकर उसे अपना लेते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान का नाम व्यक्ति किसी भी अवस्था में और किसी भी स्थान पर ले सकता है। उन्होंने कहा कि संसार के जीवों परमात्मा की सत्ता में गहरा संबंध है। शास्त्री ने कहा कि एक बालक अपने कुल का भी उद्धार कर सकता है।

उन्होंने कहा कि भगवान गोविंद जब भगवान वामन के अवतार में आए तो राजा बलि का भी कल्याण हो गया। उन्होंने कहा कि बलि के जीवन में अभिमान घर कर गया था। लेकिन भगवान वामन ने इस अभिमान को तोड़ दिया। उन्होंने श्रीमद् भागवत कथा के दौरान महादानी दधिची की कथा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र का भी बखान किया। उन्होंने कहा कि हमें दधिची की तरह दयालु दानी बनना चाहिए और भगवान श्रीराम की तरह मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। इससे केवल समाज का उद्धार होगा बल्कि एक भय और अपराध रहित स्वच्छ समाज का निर्माण भी होगा। कथा के दौरान भजन भी सुनाए गए, जिनको सुनकर श्रद्धालु आनंदित हो गए। इस मौके पर रामकली देवी, डॉ. बलदेव सैनी, डॉ. बबीता सैनी, राजेश गर्ग, विनोद गर्ग, नाथी गर्ग, नरेश गर्ग, राजीव गुलाटी, संजय गर्ग, सोमप्रकाश शर्मा, सतपाल और कैलाश बंसल मौजूद थे।

लाडवा| श्रीमद भागवत कथा में प्रवचन करते कथावाचक और आरती करते श्रद्धालु।