- Hindi News
- महम में हेपेटाइटिस बी का प्रकोप, एक की मौत
महम में हेपेटाइटिस-बी का प्रकोप, एक की मौत
महमखंड के अंतर्गत आने वाले गांव भैणी चंद्रपाल, मातो भैणी, खरकडा सहित महम शहर में (जॉन्डिस) पीलिया का प्रकोप फैल रहा हैं। खेडी गांव में स्थित एक चिकित्सालय में फिलहाल 7 मरीज दाखिल हैं जबकि दो दर्जन से अधिक मरीज इससे पीड़ित हैं। कई ऐसे मरीज हैं जिनकी बीमारी पर काबू नहीं पाया जा सका तो उन्हें रोहतक पीजीआई रिफर करना पड़ा।
अस्पताल में बनाई गई लैब में कार्यरत एलटी सत्यवान ने बताया कि उनके यहां आए मरीज मातो भैणी निवासी मंजु को 23.9, प्रदीप भैणी चंद्रपाल को 8.2, विकास खरकडा को 7.49, रामचन्द्र मातो भैणी को 12.3, सुरेन्द्र भैणी चंद्रपाल को 16.1, महम निवासी कमलेश को 14.1, सिंघवा निवासी अशोक को 28.5, महम निवासी मीना को 13.6 तक हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाया गया। उन्होंने बताया कि महीने में 30 से 40 के मध्य मरीज हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव जांच के दौरान सामने रहे हैं। मरीज में इस वायरस का स्तर केवल 1 तक सही होने की बात उन्होंने कही। शिवानंद धर्मार्थ चिकित्सालय में कार्यरत मुख्य चिकित्सक डॉ. कृष्ण कुमार लांबा के मुताबिक काले पीलिया की वजह से एक मरीज की तो मौत हो चुकी है जबकि खतरनाक स्टेज पर आने की वजह से कई मरीजों को रोहतक पीजीआई रिफर करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि पीलिया 6 प्रकार के वायरस रोग द्वारा होता है।
हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी, तथा जी में सबसे खतरनाक हेपेटाइटिस बी होता है जो इलाज के लिए यहां आने वाले मरीजों में पाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह काफी खतरनाक बीमारी है। यदि समय रहते इस पर काबू नहीं पाया जाए तो मरीज के साथ अनहोनी हो सकती है। डॉ.लांबा ने बताया कि उन्होंने मामले को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में ला दिया, बावजूद इसके अभी तक रोकथाम के कोई खास कदम नहीं उठाए गए।
^महम के वार्ड 6 नजदीक शीतला मंदिर में रहने वाली वीना ने बताया कि वह महम के सरकारी अस्पताल सहित रोहतक तक गई लेकिन बीमारी में आराम नहीं मिला। खेडी अस्पताल में आई तो उसे 13.6 हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव पाया गया। वे कई दिनो से यहीं दाखिल हैं। सरकारी अस्पताल में कोई देखभाल नहीं हुई।
^राजेन्द्र निवासी भैणी चंद्रपाल ने बताया कि उसे यहां दाखिल हुए 9 दिन हो चुके हैं। अब कुछ आराम है। जांच में उसे 8.94 बी पॉजिटिव पीलिया पाया गया। उन्होने बताया कि उसकी आखें पीली हो चुकी हैं तथा भूख लगनी बंद हो गई। यदि समय