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एसपी से गुहार, डीएसपी को सौंपी जांच

6 वर्ष पहले
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गांवमोखरा में जातिसूचक गालियां देने घर में घुसकर मारपीट करने के मामले में पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। बुधवार को एसपी शशांक आनंद से मिलने पहुंचे पीड़िताें ने बताया कि चार दिन पहले गांव के ही कुछ युवकों ने उनके घर में घुसकर मारपीट की। जब इसकी शिकायत करने के लिए वे पुलिस थाने पहुंचे तो वहां उनकी सुनवाई नहीं हुई। यही नहीं, पिछले चार दिनों से अपने बदन पर फटे कपड़े लिए पीड़ित थाने के बाहर खड़े रहे, लेकिन पुलिस की मानवता सोयी रही। इसके बाद पीड़ित एसपी से गुहार लगाने पहुंचे।

11लोगों पर मारपीट करने का आरोप

शिकायतमिलने के बाद एसपी शशांक आनंद ने तत्काल मामला दर्ज करने और इसकी जांच डीएसपी से करवाने के निर्देश दिए हैं। पीड़िता राधा ने बताया कि रोज की भांति सात फरवरी को गांव के दो युवक उनके घर के सामने दुकान पर आए। यहां बैठकर वे शराब के नशे में गाली-गलौज करने लगे। इसके खिलाफ जब उन्होंने युवकों को गाली देने की बात कही तो उनमें से एक युवक पीड़िता से गाली-गलौज करने लगा। इसके बाद राधा ने अपने घर का दरवाजा बंद कर लिया। रात करीब 11 बजे हथियारबंद युवक अपने साथियों के साथ घर में दीवार कूद कर घुस आए और पीड़िता राधा उनके बच्चे और पति से मारपीट करने लगे। इसी दौरान आरोपियों ने उनके कपड़े भी फाड़ डाले। महिला का आरोप है कि करीब 11 आरोपी उनके घर में घुसे थे। इसके बाद जब वे फटे कपड़ों के साथ महम पुलिस थाने पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी ने एफआईआर अगले दिन आकर दर्ज कराने की नसीहत दी। चूंकि आरोपियों ने गांव वापस आने की धमकी दी थी। इसलिए पीड़ित काफी दहशत में थे। वे रात भर पुलिस थाने में इंतजार करते रहे। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर उनकी शिकायत दर्ज नहीं की। पुलिस और आरोपी मिले हुए हैं। वहीं पीड़ित पक्ष के एडवोकेट कृष्ण जैमिनी का कहना है कि गांव मोखरा में इससे पहले भी कई यातनाओं के मामले सामने आए हैं। उन मामलों में भी पुलिस की कार्रवाई उदासीन रही है। खास बात यह है कि चार दिन के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है।