पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • रामलीला करवाने वाले क्लबों ने किया किनारा

रामलीला करवाने वाले क्लबों ने किया किनारा

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रोहतक. राम का राजतिलक तथा रावण के दरबार में नर्तकियों को शहरवासी इस बार नहीं देख पाएंगे। हर साल रामलीला का आयोजन करवाने वाली कोई भी कमेटी रामलीला का मंचन नहीं कर रही है। रामलीला का मंचन किए जाने से आसपास गांव से आने वाले रामलीला के शौकीन व्यक्तियों में निराशा का माहौल है। उनका कहना है कि यदि धीरे-धीरे सभी जगह ऐसे ही रामलीला का मंचन बंद होता रहा तो हम अपनी वर्षों से चली रही परपंरा को भूल जाएंगे। महम में पिछले कई सालों से विभिन्न कमेटियों द्वारा दशहरे से 10 दिन पहले रामलीलाओं का मंचन आयोजित करवाया जाता रहा है।

पंचायती, श्री सनातन धार्मिक आदर्श रामलीला तीनों अलग-अलग जगह हर साल होती रही हैं। तीनों क्लबों में से कोई भी अपने यहां रामलीलाओं का मंचन नहीं करा रहा। पंचायती रामलीला क्लब श्री सनातन धार्मिक के प्रधान प्रवीण शर्मा, अजमेर सिंहमार ने बताया कि महम में कई सालों से रामलीला का मंचन होता रहा है। अब रामलीलाओं में फुहड़ गानों द्विअर्थी शब्दों का प्रयोग बढ़ने लगा। इसके अतिरिक्त अनेक बार झगड़े भी हुए। इन सब बातों को देखते हुए उन्होंने रामलीलाओं का मंचन बंद करना ही उचित समझा। उन्होंने बताया कि अब शहर के लोगों को रामलीला की बजाए रामकथा के द्वारा धार्मिक संदेश दिया जाएगा।

संजु देशवाल का कहना है कि रामलीला के बगैर दशहरे की रौनक नहीं रहती। पूर्ण रूप से रामलीला मंचन को बंद नहीं किया जाना चाहिए। एक जगह तो रामलीला आयोजित हो ताकि हमारी परंपरा आगे बढ़ती रहे।

प्रवेश ने बताया कि रामलीलाओं में आए दिन होने वाले झगड़ों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्लबों ने रामलीलाओं का मंचन बंद कर दिया। अब रामकथा करवाई जा रही है जिसमें राम के चरित्र बारे पूरा ज्ञान दिया जाता है।

दर्शक बोले
शहरवासीकृष्णलाल ने बताया कि रामलीला हमारे पूर्वजों के समय से चली रही हैं। भावी पीढ़ी को भी हिंदू रीति रिवाजों के बारे ज्ञान होना चाहिए। रामलीला के माध्यम से जहां आने वाले व्यक्तियों का मनोरंजन होता था वहीं विभिन्न पात्रों से शिक्षा भी प्राप्त होती थी। एक जगह तो अवश्य रामलीला होनी चाहिए।