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एसडीएम ने लगाई कर्मचारियों की क्लास

6 वर्ष पहले
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तहसीलकार्यालय में लाइसेंस बनवाने के लिए लगाए गए बोर्ड पर दर्शाई गई फीस से अधिक पैसे वसूले जाने का मामला दैनिक भास्कर में प्रकाशित होने के बाद एसडीएम दलबीर फौगाट ने कर्मचारियों की बैठक लेकर मामले की जानकारी हासिल की। सभी से लिए जाने वाले पैसों की उपभोक्ताओं को रसीद दिए जाने की बात कहते हुए बढ़ी हुई फीस को चार्ट पर ठीक करवाया गया।

कर्मचारियों ने बताया कि वे नए लाइसेंस पर 100 रुपए कम्प्यूटर फीस के अतिरिक्त अन्य वाहनों के 90 रुपए वसूलते हैं। बाकी के 20 रुपए डीसी आफिस से आए झंडों के उपभोक्ताओं से लिए जाते हैं। इस तरह एक उपभोक्ता से 210 रुपए लिए जा रहे हैं। एसडीएम ने जो हुआ सो हुआ कि तर्ज पर आगे से सभी को ध्यान रखकर मामले में लापरवाही बरतने की बात कहते हुए सभी को रसीद झंडे देने की बात कही।

इसतरह लगाते थे चूना

जिलाउपायुक्त कार्यालय से बीते महीनों सैनिकों स्वच्छता दिवस के स्लोगन लगे हुए पांच हजार रुपए के लगभग कुछ झंडे आए थे। एक उपभोक्ता को 20 रुपए के हिसाब से दो झंडे देने थे। सप्ताह में दो बार लाइसेंस बनाने नवीनीकरण, वाहनों के रजिस्ट्रीकरण का कार्य तहसील में होता है। सप्ताह में 100 के लगभग उपभोक्ता लाइसेंस अन्य कार्य करवाने के लिए आते हैं। यदि कर्मचारी सभी को झंडे देते तो पांच हजार रुपए के झंडे 250 उपभोक्ताओं में तीन सप्ताह के अंदर खत्म हो जाने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कर्मचारी झंडों के नाम पर उपभोक्ताओं से 20 रुपए तो वसूलते रहे, लेकिन उन्हें झंडे नहीं दिए गए। इस तरह झंडे देने से जहां प्रत्येक महीने हजारों रुपए का गोलमाल हुआ वहीं दूसरी तरफ झंडे कार्यालय में इसी तरह पड़े रहे। जिन उपभोक्ताओं से झंडों के नाम पर पैसे ले लिए गए उन्हें अब झंडे दिए जाएंगे। लाइसेंस ब्रांच में कार्यरत कर्मचारी विरेन्द्र ने बताया कि झंडों के नाम पर पैसे तो लिए जाते हैं लेकिन उन्होंने आज पहली बार फाइलों पर झंडे लगाए हैं।

डीसी आफिस से आए झंडे जिनके नाम पर लिए जाते थे अधिक पैसे।