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अदालतें कमाई का जरिया नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

5 वर्ष पहले
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इलाहाबादहाईकोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि राज्य अदालतों को कमाई का जरिया नहीं बना सकते। राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि वह हाईकोर्ट और निचली अदालतों के कामकाज के लिए जरूरी धन मुहैया कराए। जस्टिस पीकेएस बघेल ने हाईकोर्ट के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ के महामंत्री मनबोध यादव की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। कहा, ‘राज्य सरकार, राजकोष पर आर्थिक बोझ का हवाला देकर कर्मचारियों के वेतनवृद्धि नियमावली का अनुमोदन देने से मना नहीं कर सकती।



पिछले पांच साल के आंकड़े बताते हैं कि सरकार अदालतों पर जितना खर्च करती हैं कोर्ट फीस और स्टाम्प शुल्क के रूप में उससे दोगुनी से अधिक रकम पाती हैं। इसमें मुकदमों में लगने वाले हर्जाने या जुर्माने और कोर्ट परिसर के दुकानों की नीलामी राशि शामिल नहीं है।’ इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को “उच्च न्यायालय अधिकारी, कर्मचारी आचरण एवं सेवा शर्त संशोधन नियमावली 2005’ छह हफ्ते में अनुमोदित करने का निर्देश दिया है।

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