ग्रामीणों ने की पंचायत, प्रस्ताव फीस रसीद की कॉपी दिखाई
दीनबंधुछोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पास 44 एकड़ जमीन में सरकार द्वारा हाल ही में प्रस्तावित की गई देश की तीसरी साइंस सिटी की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है। लगातार दूसरे दिन रविवार को मुरथल के ग्रामीणों ने प्रस्तावित जमीन पर साइंस सिटी बनाने का कड़ा विरोध कर रोष प्रदर्शन किया। मुरथल गांव में इस मसले को लेकर पंचायत हुई और फिर निर्णय लिया गया वह अपने प्लाॅटों के स्थान पर साइंस सिटी नहीं बनने देंगे। सरकार इसे दूसरी जगह पर बना सकती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने मुख्यमंत्री को भी गुमराह किया है। जमीन पर खाद के गड्ढे के लिए 66-66 गज के प्लाॅट देने का पंचायत ने प्रस्ताव पास किया था। ग्रामीणों ने प्लॉट के बदले फीस भी पंचायत खाते में जमा की थी। फीस रसीद की पंचायत प्रस्ताव की कॉपी ग्रामीणों ने सार्वजनिक की। यही नहीं आरोप लगाया कि बीडीओ पंचायत चेयरमैन के प्लाॅट के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर मोहर भी है। प्रशासन इस सबूत को नकार नहीं सकता। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेताया कि यदि उन पर दबाव दिया गया तो वह सत्याग्रह करेंगे। जमीन को जबरदस्ती करके छीनने नहीं देंगे। मुरथल के पूर्व पंच गजराज, पूर्व पंच वीरेंद्र, पूर्व पंच लोकेश, पूर्व पंच सुरेंद्र, पूर्व सरपंच राजबीर, रामेश्वर खाती, महासिंह, अतर सिंह, कप्तान सिंह, सुनील कुमार, कमला, सविता, कुसुम, संतोष, भतेरी ने कहा कि गांव में गंदगी फैल रही थी। जिसके चलते पंचायत से आग्रह किया गया था कि उन्हें कुरड़ी के लिए जमीन दी जाए। इसके बाद पंचायत ने प्रस्ताव पास करके उन्हें सरकारी नियम के अनुसार 66-66 गज के प्लाॅट कुरड़ी के लिए दिए गए थे। प्रस्ताव अगस्त 2014 में पास किया गया था।
} साइंस सिटी के लिए जो जमीन प्रशासन ने प्रस्तावित की है उसका मुरथल के ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं।
प्रशासन200 करोड़ का प्रोजेक्ट लेकर आया है। ग्रामीण बेवजह इसका विरोध कर रहे हैं।
}ग्रामीणोंकह रहे हैं कि 2014 में मुरथल की पंचायत ने 66-66 गज के प्लाॅट देने का प्रस्ताव पास किया था पंचायत खाते में प्लाॅटों की जो फीस जमा की थी उसकी असल कॉपी उनके पास है।
यहप्रस्ताव मान्य नहीं है। मुरथल में 100 से ज्यादा एकड़ पंचायती जमीन थी। जमीन का प्रस्ताव पास करते समय पंचायत समिति प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई।
}ग्रामीणकह रहे हैं गांव में फैल रही गंदगी के समाधान के लिए यह करना जरूरी था।
मुरथलमें कचरा प्लांट बनाया जा रहा है, ऐसे में ऐसे गड्ढों की अब क्या जरूरत है। इसके साथ गांव से चार किलोमीटर दूर पंचायत द्वारा गंदगी के लिए 66-66 गज के प्लाट देना गलत है। इसकी जांच होगी।
}ग्रामीणोंके विरोध को देखते हुए प्रशासन ने क्या निर्णय लिया है।
मुरथलके ग्रामीणों को सोमवार को लघु सचिवालय में मिलने के लिए बुलाया है। बातचीत से मसले का निपटारा किया जाएगा।
सोनीपत को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद कुछ माह में काफी बदला। जिन प्रोजेक्टों के लिए प्रशासन जमीन के लिए भटकता रहता था, अब उन प्रोजेक्टों के लिए आसानी से जमीन मिल रही है। पहले कचरा प्लांट के लिए मुरथल में जमीन, फिर नंदीशाला के लिए हरसाना में। यही नहीं अब वन विभाग की नर्सरी भी कॉरपोरेशन में शामिल हुए मुरथल गांव की जमीन पर बनाई जा रही है। यह करीब तीन एकड़ पर बनेगी। इसके साथ अब चार एसटीपी साइंस सिटी भी इन्हीं गांवों की जमीन पर बनाए जाने का प्रस्ताव है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने जमीन के लिए सरकारी फीस भी जमा की है। यह फीस गुड़गांव ग्रामीण बैंक स्टेट बैंक पटियाला में जमा करवाई गई थी। ग्रामीणों ने फीस रसीद की कॉपी भी दिखाई। सामान्य वर्ग के लोगों ने जहां करीब 16750 रुपए जमा किए थे। वहीं एससी वर्ग के लोगों ने 13400 रुपए फीस जमा की थी। फीस जमा करने वाले लोगों की संख्या करीब तीन हजार बताई जा रही है।
सोनीपत . प्रस्तावकी कॉपी।
राजीव रतन उपायुक्तसोनीपत
सोनीपत . मुरथलके ग्रामीण प्रस्ताव फीस की रसीद को दिखाकर रोष प्रदर्शन करते हुए।