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स्क्रीनिंग कमेटी ने बताया था अयोग्य

7 वर्ष पहले
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दीनबंधुछोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में हो रही नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर से सवालों के घेरे में गई है। विवि में सहायक कुलसचिव पद पर ऐसे उम्मीदवार की नियुक्ति की गई, जिसे स्क्रीनिंग कमेटी ने नान इलीजिबिल (अयोग्य) घोषित कर दिया था।

नियुक्ति को लेकर सवाल भी कई खड़े हुए थे, लेकिन चूंकि मामला हाई प्रोफाइल था, इसलिए दबा दिया गया। इस पूरे मामले का खुलासा सूचना के अधिकार कानून के जरिए मिली जानकारी से हुआ है। यह जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता आनंद प्रकाश को मिली है। अब उन्होंने विवि के कुलाधिपति एवं राज्यपाल को पत्र भेजकर कुलपति एचएस चहल के कार्यकाल में हुई सभी नियुक्तियों की जांच कराने की मांग की है। करीब दो साल के प्रयास के बाद यह जानकारी राज्य सूचना आयुक्त के पास दूसरी अपील किए जाने पर मिली है।

जानकारी के अनुसार फरवरी 2009 में सहायक कुलसचिव पद के लिए साक्षात्कार लिए गए थे, जिसमें विवि की स्क्रीनिंग कमेटी ने जिस महिला उम्मीदवार को स्क्रीनिंग के लिए अयोग्य घोषित किया था, उसे भी नियुक्ति मिल गई। स्क्रीनिंग कमेटी की ओर से अयोग्य होने के बावजूद भी केवल उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया बल्कि नौकरी भी दे दी गई। इस बाबत जब सूचना के अधिकार कानून के जरिए पूछा गया कि आखिर उन्हें किस आधार पर नियुक्ति दी गई तो बताया गया कि योग्य उम्मीदवार को नियमों में कुछ छूट भी दी जाती है।

शैक्षणिक योग्यता में आगे नहीं

सहायककुलसचिव की नियुक्ति पाने वाली उक्त महिला उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता नौकरी नहीं पा सके अन्य उम्मीदवारों से कम थी। मसलन जहां एक उम्मीदवार पीएचडी के साथ अवार्डी भी था। ऐसे में आरटीआई कार्यकर्ता का सवाल था अगर योग्य को ही छूट मिलनी थी तो पीएचडी धारक को क्यों नहीं मिली?

विवि में नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी नहीं की जाती। वे योग्य थी, इसलिए उन्हें कुछ छूट भी मिली। इस मामले में उम्मीदवार ने अपनी योग्यता के सभी मापदंड बाद में पूरे कर लिए थे। ऐसे में उनकी नियुक्ति गलत नहीं थी।\\\'\\\' आरकेअरोड़ा, कुलसचिव,दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल।

छोटूराम विवि में नौकरियां सिफारिश के आधार पर लगी है। आरटीआई में स्पष्ट है कि स्क्रीनिंग कमेटी ने उन्हें अयोग्य घोषित किया, लेकिन फिर भी नियुक्ति हुई। महामहिम राज्यपाल से अपील