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1 लाख 67 हजार मतदाता करेंगे किस्मत का फैसला
नारायणगढ़विधानसभाके 1 लाख 67 हजार मतदाता 15 अक्तूबर को किस की किस्मत का फैसला करेंगे। भविष्य के गर्भ में है लेकिन यहां के मतदाताओं का मिजाज कुछ अलग है। यदि किसी भी राजनीतिक दल ने किसी प्रत्याशी की भवनाओं का निरादर किया तो मतदाताओं में उसका भरपूर साथ दिया जाएगा।
नारायणगढ विधान सभा से 6 बार कांग्रेस 3 बार निर्दलीय 1 बार इनेलो 1 हविपा, 1 बार जनता पार्टी तथा 1 बार बहुजन समाज पार्टी को विधायक बनाया इस विधान सभा से आम तौर पर गुर्जर या सैनी प्रत्याशी को ही विजय हासिल हुई आरक्षण के दौरान बहुजन समाज पार्टी को हरियाणा में पहली विजय नारायणगढ़ से ही मिली थी
यहां से सैनी प्रत्याशी साधु राम सैनी ने 1952 1957 मे कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विजय हासिल कि जबकी साधु राम सैनी 1987 में हरियाणा लोकदल के प्रत्याशी बने ताऊ देवी लाल की सुनामी में भी पराजय का मुंह देखना पड़ा क्योंकी 1987 के चुनाव से पूर्व चौ. जगपाल सिंह हरियाणा के इजीं. इनचीफ का पद त्यागकर जनता के बीच में कांग्रेस के खिलाफ ताऊ देवी लाल के नेतृत्व में मोर्चा खोले थे। जनता जगपाल सिंह को ताऊ देवी लाल का उम्मीदवार देखना चाह रही थी, लेकिन एन मौके पर टिकट साधु राम सैनी को बना दिया गया जिसका गुस्सा जनता ने अपना फतवा दे कर सुनादिया।
इसी चुनाव में कांग्रेस में मंत्री रहे चौ. लाल सिंह भी जमानत गंवा बैठे इसी प्रकार 1982 में चौ. लाल सिंह को कांग्रेस पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो जनता ने कांग्रेस प्रत्याशी टिका जगजीत सिंह को हरा दिया इसी तरह टिकट की लड़ाई में 1962 में जगजीत सिंह का जनता ने विधान सभा में पहुंचा दिया।