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बाल श्रम कानून की उड़ रही धज्जियां, प्रशासन भी नहीं दे रहा ध्यान
नरवाना. मजदूरीके लिए ईंट-रोड़े को तोड़ते बच्चे।
नरवाना कोर्ट परिसर में बच्चे कर रहे हैं मजदूरी
भास्कर न्यूज | नरवाना
सरकारचाहे कितने भी कार्यक्रम करे, लेकिन शहर में छोटे-छोटे बच्चे दुकानों मजदूरी का कार्य कर रहे हैं। सरकार प्रशासन बाल मजदूरी रोकने के लिए आए दिन नए-नए कानून बना रही हैं। वहीं दूसरी ओर नरवाना में भीख मांगने वाले छोटे-छोटे बच्चों की तादाद बढ़ती जा रही है।
प्रशासनबरत रहा कोताही
शहरवासीराजेंद्र, रमेश, मीनू सुर्या आदि शहरवासियों ने बताया कि शहर में छोटे-छोटे बच्चे हाथों में कटोरे उनके अंदर देवी-देवताओं की फोटो रखकर भीख मांगते है। शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन की कोताही के कारण जिन बच्चों के हाथों में किताब होनी चाहिए। आज उनके हाथों में भीख के कटोरे हैं। बहुत से बच्चे तो गंदगी के ढेर से बिनने हुए कागज को ही अपना भविष्य बता रहे हंै। शहर के होटलों चाय की दुकानों पर काम करने वाले बाल-मजदूरों की बढ़ती संख्या से ऐसे लगता है कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम महज कागजी हैं।
क्षेत्र के ईट भट्ठों शहर के लगभग सभी होटलों चाय की दुकानों पर बाल मजदूर काम करते देखे जा रहे हैं। नरवाना कोर्ट में भी शनिवार को छोटे बच्चों को मजदूरी करते देखा गया है। इन बच्चों को मजदूरी के नाम पर कम रुपए ही दिए जाते हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे चाय की दुकानों होटलों पर भी काम करते हैं।