कमल के फूल की तरह जीवन जिएं : अचल मुनि
स्थानीयजैन स्थानक में चल रहे प्रवचन के तीसरे दिन सोमवार को जैन शिरोमणि अचल मुनि, शीतल मुनि एवं अतिशय मुनि ने मनुष्य के जीवन जीने की कला पर प्रकाश डाला।
इंद्रियोंपर नियंत्रण लगाएं
अचलमुनि ने कहा कि मनुष्य को भौतिकवादी संसार में कमल के फूल की भांति जीवन जीना चाहिए। जिस प्रकार कमल का फूल माया रूपी कीचड़ में रहता हुआ भी उससे ऊपर संसार को प्रसन्नचित्त करता है। स्वयं भी ऐसा सम्मान स्थान पाता है कि देवताओं को अर्पित किया जाता है। उसी प्रकार मनुष्य को भी चाहिए कि वे अपनी इंद्रियों और व्यसनों पर नियंत्रण लगाते हुए इस माया रूपी संसार की गंदगियों को दूर करते हुए एक श्रेष्ठ व्यक्ति के उत्तरदायित्व और आचरण को अपनाए।
श्रेष्ठ व्यक्ति के उत्तरदायित्व और आचरण को अपनाएं सभी
नशे की लत में व्यक्ति को कुछ नहीं सूझता
मुनिने बताया कि मोह ही सभी प्रकार केे बंधनों का स्त्रोत है। जैसे नशे की लत में व्यक्ति को कुछ दिखाई देता है और ही कुछ सूझता है। उसी प्रकार मोहमाया में लिप्त व्यक्ति को भी स्वार्थ के सिवाय और कुछ नहीं सूझता और वह धीरे-धीरे कुव्यसनों की ओर अग्रसर होता जाता है। वह स्वयं भी अपना शत्रु बन जाता है एवं औरों को भी बना लेता है। प्रवचन में जैन सभा के प्रधान नरेश जैन, मंत्री विमल जैन, कोषाध्यक्ष राजेश जैन, वेद प्रकाश जैन, पिरथी जैन, सोनू जैन, दीपक जैन, सुरेश जैन और सज्जन जैन इत्यादि जैन सभा के सदस्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।