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दर्शन और मनोविज्ञान का भंडार है भागवत गीता : गार्गी महाराज

6 वर्ष पहले
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नरवाना | संतश्री श्री 1008 स्वामी मुक्तानंद गार्गी महाराज का मंगलमय प्रवेश पतराम नगर नरवाना में स्थित दुर्गा मन्दिर मेंं हुआ। उनके आगमन से नरवाना शहर में आध्यात्मिक वातावरण का माहौल बना हुआ है। महाराज गार्गी श्री गीता रामचरितमानस के मर्मज्ञ हैं।

वे प्रतिदिन 3 बजे से 6 बजे तक सत्संग कर श्रद्धालुओं को अध्यात्म का पाठ पढ़ाएंगे। आयोजन समिति की सदस्या ऊषा मित्तल ने बताया कि सत्संग के पहले घंटे में ध्यान योग, दूसरे घंटे में गीता पाठ तथा अंतिम घंटे में महाराज श्री मुखारविंद होंगे। गार्गी जी महाराज ने बताया कि गीता एक आध्यात्मिक ग्रंथ ही नहीं बल्कि दर्शन और मनोविज्ञान का भण्डार है। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से इस संसार को जीने की कला सिखाई है। गीता को जितनी बार भी पढ़ा जाए वह नए अर्थ को लेकर अवतरित होती है। इसलिए इसकी प्रासंगिकता हर काल, हर युग में बनी रहती है। इस अवसर पर मणिकांता, वीना रानी, गीतानंद पुजारी, अचल मित्तल, सांवर मल, मंगत राम बांके बिहारी संकीर्तन मण्डल के सदस्य श्रद्धालु उपस्थित थे।