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वेतन के लिए धक्के खा रहे हैं ट्यूबवेल ऑपरेटर

6 वर्ष पहले
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जनस्वास्थ्यविभाग सब डिवीजन में कार्यरत करीब 40 ट्यूबवेल आॅप्रेटर मासिक मजदूरी भत्ते के लिए पिछले कई माह से कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। सोमवार को ट्यूबवेल आॅपरेटर बीडीपीओ कार्यालय पहुंचे, लेकिन बीडीपीओ से मुलाकात नहीं हो सकी।

जनस्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2014 में हुड्डा सरकार के शासनकाल में ग्रामीण क्षेत्र के ट्यूबवेल के रखरखाव तथा ट्यूबवेल को चलाने का कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों को सौंप दिया था। ग्राम पंचायतों ने ट्यूबवेल की देखभाल चलाने के लिए आॅप्रेटरों की नियुक्ति की थी। जनस्वास्थ्य विभाग की नीलोखेड़ी सब डिवीजन के तहत करीब 40 गांवों में आॅप्रेटर की नियुक्ति की गई थी। टयूबवेल का हस्तांतरण ग्राम पंचायत के पास जाने से आॅप्रेटर को वेतन के लाले पड़ गए। कई-कई माह बीत जाने के बाद भी आॅप्रेटर को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। मामले को लेकर आॅप्रेटरों ने सितंबर 2014 में जनस्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय पंचकूला में धरना शुरू कर दिया था। तत्कालीन हुड्डा सरकार ने आॅप्रेटरों का वेतन 4050 रुपए मासिक से बढ़ाकर 8100 रुपए करने के आदेश जारी किए थे। आॅपरेटर समस्या को लेकर बीडीपीओ से िमलने गए पर वह नहीं मिले।

विकास और पंचायत विभाग का पत्र ठंडे बस्ते में

विकासएवं पंचायत विभाग हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इस बाबत हरियाणा के समस्त उपायुक्त, जिला विकास एव पंचायत अधिकारी तथा खंड विकास एव पंचायत अधिकारियों को पत्र लिखा था, लेकिन इस पत्र को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अपने पत्र क्रमांक डीएफए -2-2014-50933-54 दिनांक 29 अगस्त 2014 को लिखा था, जनस्वास्थ्य विभाग के प्रमुख अभियंता ने सूचित किया है कि सरकार द्वारा टयूबवेल आप्रेटर को 8100 रुपए प्रतिमाह कार्य की मजदूरी भत्ता देने का निर्णय लिया गया है। इसी पत्र में आॅप्रेटरों को प्रत्येक माह की सात तारीख को वेतन उनके खाते में जमा करवाने के निर्देश भी जारी किए थे।