धान के दाम की मार, किसान मायूस
अनाजमंडी में बासमती 1509 धान की आवक बढ़ने के साथ ही इसके दामों में गिरावट का सिलसिला जारी है। जिससे किसानों में मायूसी छाई हुई है। हाथ से कटाई की गई इस धान को व्यापारी मात्र छब्बीस सौ रुपए तक खरीद कर रहे हैं।
जबकि कंबाइन से काटी गई धान को पंखा लगाने के बाद करीब 24 सौ रुपए तक खरीदा जा रहा है। किसानों को उनकी फसल के वाजिब दाम नहीं मिलने से उनमें रोष है। फसल की कम पैदावार के साथ ही दामों में गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि उनकी फसल बीते वर्ष की अपेक्षा दो हजार रुपए कम दामों में खरीदी जा रही है।
पैदावारभी 6 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ हो रही कम : किसाननीतिश कुमार, रामभज शर्मा, संजय कुमार, धर्मपाल हरप्रीत सिंह का कहना है कि मंडी में खरीदारों द्वारा चावल का रेट घटने का बहाना बनाकर उनकी धान कम दामों में खरीदी जा रही है। इस बार सूखा पड़ने से धान की पैदावार में भारी कमी आई है।
निसिंग. अनाजमंडीमें आई धान का दृश्य।
बारीक धान के दाम भी निश्चित करे सरकार
किसानएवं भाकियू ब्लाॅक प्रधान कुलदीप सिंह बब्बर का कहना है कि सरकार को बारीक धान के दामों को भी निश्चित कर देना चाहिए। मोदी सरकार अच्छे दिन आने का दावा करती थी, लेकिन किसानों की स्थिति इसके विपरीत है। फसल की पैदावार में घटोतरी कम दामों को देखते हुए किसानों के बुरे दिन गए हैैं। किसानों को मौसम खरीदारों की मनमानी की मार झेलनी पड़ रही है। जिससे किसान बेबस हैं। किसान अपनी खून पसीने की कमाई कम दामों पर बेचने को मजबूर हैं। जिससे किसानों को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।