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मानव ही मानवाधिकारों का हनन करता है : गोस्वामी

7 वर्ष पहले
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विश्वमानवाधिकारदिवस के मौके पर डीएवी कॉलेज में भारतीय अध्यापक परिषद की ओर से एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई। इसका विषय विश्व मानवाधिकार के परीपेक्ष्य में अध्यापकों की भूमिका रहा। परिषद के संस्थापक राम कृष्ण गोस्वामी ने बतौर मुख्यातिथि दीप प्रज्ज्वलित किया। प्रिंसिपल डॉ. कामदेव झा की ओर से सभी का स्वागत किया गया। संगोष्ठी में मुख्यातिथि गोस्वामी ने कहा कि मानव ही आज मानव के अधिकारों का हनन कर रहा है। जिसे लेकर पूरा विश्व गहन चिंता में है।

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट कर दिया था कि धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का नाश जरूरी है। उस समय धर्म से श्रीकृष्ण का अर्थ मानव के अधिकार से ही था। गीता में यदा यदा ही धर्मस्य श्लोक में भगवान ने कहा है कि जब भी पृथ्वी पर धर्म की हानि होगी तो मानव देह के रूप में भगवान का अवतार होगा। उन्होंने कहा कि अपराधी को दंड देना ही धर्म की रक्षा है। इस मौके पर दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्वान प्रो. राजबीर सोलंकी ने कहा कि धर्म का अर्थ सुरक्षा, सदभावना और विकास है। इस अवसर पर केयू के कॉमर्स विभाग के प्रो. तेजेंद्र शर्मा, नेशनल अवेयरनेस फॉर्म के महासचिव बलभद्र देव थापर, डॉ. सीडीएस कौशल, डॉ. मेजर सिंह और प्रो. सुषमा मौजूद थीं।