(गोली लगने से मारे गए ज्ञानचंद का फाइल फोटो। )
पिहोवा। अरनैचा के ज्ञानचंद की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। रविवार की रात वह ड्यूटी से वापस लौट रहा था। उसे लेशमात्र भी अहसास नहीं था कि वह किसी और लड़ाई में फंस सकता है। रविवार रात उसके चचेरे भाई पर विरोधी गुट ने हमला किया। गोलियों की चपेट में ज्ञान भी गया। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार देर सायं को जैसे ही ज्ञान का शव गांव में पहुंचा तो घर में चीख पुकार मच गई। सैकड़ों लोगों ने उसकी शव यात्रा में शामिल होकर उसे श्रद्धांजलि दी। गमगीन माहौल के बीच उसका अंतिम संस्कार किया गया।
ज्ञान का तीन साल का मासूम बेटा अंकित तो यह भी नहीं जानता कि आखिर उसके पिता को हुआ क्या है। रोते हुए रुंधे गले से गांव वासी कर्म चंद ने बताया कि उसका लड़का ज्ञानचंद प्राइवेट बस पर ड्राइवर था। रविवार को वह ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहा था। लेकिन अब वह कभी घर नहीं पहुंच पाएगा। ग्रामीण मेजर रामेश्वर के मुताबिक ज्ञान गांव में सबका चहेता था। उसके अच्छे व्यवहार के लिए सब उसे सराहते थे। उसका दूसरा भाई सोमनाथ मलेशिया में है। ऐसे में मां बाप और परिवार का सहारा ज्ञानचंद ही था। ग्रामीणों के मुताबिक गांव के छात्र भी उसकी बस के आने का इंतजार करते थे ताकि अपने ज्ञान के साथ में मुफ्त सफर कर सकें।
घटनाके बाद सोमवार को एसपी अश्वनी शैणवी ने मौके का मुआयना किया। बताया जा रहा है कि पुलिस को मौके से पिस्टल की चली गोलियों के खोल बरामद हुए हैं। जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या में पिस्टल का इस्तेमाल किया गया है। पिस्टल के लाइसेंसी या अवैध होने का पता आरोपी के पकड़े जाने के बाद ही चल पाएगा। डीएसपी गौरखपाल राणा ने बताया कि आरोपी की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। जल्द ही उसे काबू कर लिया जाएगा।
पहले से भी कई मामले दर्ज हैं आरोपी के खिलाफ : जानकारी के अनुसार आरोपी रामफल इससे पूर्व भी शराब के ठेकेदारों के बीच हुए झगड़े में 307 के मुकदमे में नामजद है। उस वक्त भी रामफल पर एक अन्य ठेकेदार पर गोली दागने का आरोप लगा था। आरोप है कि रविवार की रात वह गुरमेल से कुछ दिन पहले हुए झगड़े का बदला लेने आया था। लेकिन मौके पर बेकसूर ज्ञानचंद मारा गया। ज्ञानचंद की मौत के बाद गुरमेल भी गहरे सदमे में है और बार-बार अस्पताल में उसे ही पुकार रहा है।
गुरमेल के मुताबिक उन लोगों ने उस पर गोलियां चला दी। हमला होता देख उसने उसने ज्ञानचंद को पुकारा। आवाज सुनकर ज्ञानचंद ने बाइक वापस मोड़ ली। यह देख हमलावरों ने उस पर भी फायरिंग शुरू कर दी। ज्ञानचंद के शरीर में तीन गोलियां लगी। एक गोली उसकी रीड ही हड्डी में धंस गई। जबकि एक गोली गुरमेल की टांग में गोली लगी। हमले के बाद आरोपी भाग निकले।
एरिया को लेकर थी रंजिश : शिकायत में घायल गुरमेल ने कहा कि कुरुक्षेत्र में थर्ड गेट के पास उनका अंग्रेजी शराब का ठेका है। उनके एरिया में रामफल नामक एक अन्य ठेकेदार अवैध रूप से शराब की सप्लाई करता था। जिसे लेकर 10 से 15 दिन पहले उनकी रामफल से तकरार हो गई थी। तभी से वह रंजिश रखे हुए था। इसी रंजिश के चलते रामफल ने अपने साथियों के साथ घात लगा उन पर हमला किया। पुलिस ने शिकायत पर आरोपी रामफल और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है।
घेरकर बोला हमला : घर से कुछ ही दूरी पर ज्ञानचंद और उसके चचेरे भाई गुरमेल पर हमला हुआ। गुरमेल शराब का ठेकेदार है। उसकी शराब का काम करने वाले रामफल और उसके साथियों से दुश्मनी थी। गुरमेल के मुताबिक ज्ञान ड्यूटी से लौटते समय रास्ते में खेतों में उसके पास रुक गया। काम निपटाने के बाद वे दोनों भाई अपनी अपनी बाइक पर घर के लिए चल पड़े। ज्ञान उससे थोड़ा आगे था। रास्ते में घर से कुछ दूर पहले पुलिया पर रामफल और उसके साथियों ने उसे घेर कर हमला बोल दिया।
पूर्व में भी हो चुकी हैं भिड़ंत: शराब बेचने के एरिया को लेकर झगड़े का यह पहला मामला नहीं है। अक्सर एरिया के लिए शराब कारोबारियों में झड़प होती है। करीब डेढ़ माह पहले कुरुक्षेत्र में भी शराब बेचने के एरिया को लेकर दो गुटों के बीच खूनी झड़प हुई थी। तब भी एक पक्ष ने गोलियां दागी थी।
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लड़ाई शराब ठेकेदारों की-जान गई किसी की, ज्ञान की हत्या के बाद गांव में है तनाव |