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नजर चंडीगढ़ पर, दौड़ दिल्ली की

7 वर्ष पहले
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विधानसभाचुनावमें अब कुछ ही दिन बचे हैं। जिले में ऐसे कई नेता हैं, जो विस चुनावों की तैयारी पिछले पांच सालों से कर रहे थे। इनकी लक्ष्य चंडीगढ़ स्थित विधानसभा में पहुंचना है। बेशक लक्ष्य नजर चंडीगढ़ की तरफ है। लेकिन दावेदारों की दौड़ चंडीगढ़ से उल्ट दिल्ली लग रही है। पिछले कई दिनों से कांग्रेस और भाजपा के अधिकांश टिकट दावेदार दिल्ली में जमे हैं। या उनके रोजाना ही चक्कर लग रहे हैं। कारण दोनों ही दलों का हाईकमान दिल्ली में स्थित है। हाईकमान से ही टिकट पक्की होनी है। ऐसे में कोई भी दावेदार अपनी बरसों की मेहनत को परवान चढ़ाने के लिए कसर नहीं छोड़ना चाहता। इसीलिए इनका ठिकाना इन दिनों दिल्ली है। खैर यह तो एक दो दिन में स्पष्ट होगा कि टिकट रूपी लाटरी किसकी लगेगी।

थानेसरपिहोवा के दावेदार ज्यादा : जिलेमें इनेलो ही एकमात्र ऐसा दल है, जिसने चार में से तीन पर अपने प्रत्याशी कई रोज पहले ही मैदान में उतार दिए थे। लाडवा की सीट पर भी लगभग इनेलो प्रत्याशी तय कर चुका है। लेकिन भाजपा और कांग्रेस इस मामले में पिछड़े हुए हैं। हालांकि भाजपा ने शाहाबाद और लाडवा में प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। लेकिन पिहोवा थानेसर पर अब तक फैसला नहीं हुआ। वहीं कांग्रेस तो बिल्कुल पीछे हैं। जिले में थानेसर पिहोवा सीट को लेकर ही सबसे ज्यादा गहमागहमी है। कारण इन सीटों पर जहां भाजपा में दूसरे दलों से आए नेता दावा जता रहे हैं। खासकर थानेसर सीट पर। यहां बाहर से आए उम्मीदवारों संग कई पुराने भाजपाई भी लाइन में लगे हैं। वहीं कांग्रेस में थानेसर सीट पर मजबूत दावेदार ढूंढा जा रहा है। यही हाल पिहोवा सीट को लेकर है। हालांकि चर्चा यही है कि दोनों दलों के हाईकमान प्रत्याशियों का लगभग चयन कर चुके हैं। आजकल में इसकी घोषणा भी हो जाएगी।

दावेदारों में एक तरह से टिकट की जद्दोजहद है। वहीं उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब चटकारे लिए जा रहे हैं। जयभगवान शर्मा और सुभाष सुधा, भाजपा के दावेदार हैं। सोशल मीडिया में दोनों के समर्थक एक दूसरे की टांग खिंचाई कर रहे हैं। शर्मा सुधा दोनों अब भाजपा में दावेदार हैं। इसे संयोग ही कहा जाएगा कि दोनों पहले कांग्रेस में दावेदार थे। पहले शर्मा, फिर सुधा भाजपाई बन गए। आजकल इसी को लेकर फेसबुक पर कमेंट रहे हैं। शर्मा जहां कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे, वहीं सुभाष सुधा हरियाणा वित्त आयोग के सदस्य थे।