पिहोवा। लोग जहां एक-दूसरे के जीवन में अंधेरा करने पर उतारु रहते हैं तो वहीं एक 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला लोगों के घरों में खुशियां बढ़ाने घरों को रोशन करने के काम में जुटी है। त्योहारों के दिनों में लोगों की खुशियों के लिए काम करने में इन बूढ़े हाथों को बहुत आनंद आता है। इन दिनों यह बूढ़े हाथ शरद पूर्णिमा के त्योहार के लिए मिट्टी के गरबड़े बनाने में लगे हुए हैं।
पिहोवा के खेड़े वाली गली में रहने वाली 85 वर्षीय सोना देवी ने बताया कि वह लगभग 70 वर्ष से इस काम को कर रही है। दीवाली के अवसर पर दीपक बनाना उसके लिए एक खेल है। थोड़ी मिट्टी लेकर अगूंठे से वह सहज में ही मिट्टी का दीया तैयार कर देती है। गरबड़े उतरी हरियाणा पंजाब में मनाया जाने वाला एक त्योहार है।
कुल्हड़नुमा इन गरबड़ों में तीखी चीज से सुराख बनाया जाता है। पूर्णिमा की रात को लक्ष्मी पूजन के समय इनमें दीपक जलाकर पूजा की जाती है। जलते दीपक सहित इन गरबड़ों को लेकर बच्चे घर-घर जाते हैं। घर के लोग उनमें पैसे डालते हैं। हालांकि दीवाली के अन्य सामान अब बिजली के सहारे से चाक पर बनाए जाते हैं लेकिन मिट्टी के दीपक हाथ से ही बनाए जाते हैं।
सोना देवी के साथ पिछले 40 वर्षों से उसकी पुत्र वधु भी उसका सहयोग करती है। सोना देवी के बेटे सोमनाथ ने बताया इस समय सबसे बड़ी समस्या मिट्टी की है। आसानी से मिट्टी उपलब्ध नहीं होती। भारी भरकम दाम देकर बहुत दूर से मिट्टी लानी पड़ती है। जिस कारण नई पीढ़ी इस काम से दूर हटती जा रही है।
- 85 वर्षीय वृद्ध महिला शरद पूर्णिमा के त्योहार के लिए बना रही मिट्टी के गरबड़े।
पिहोवा| उम्र के आखिरी पड़ाव में भी मिट्टी के दीयों से लोगों के घर रोशन कर रही है 85 वर्षीय सोना देवी।