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- जमीन के साथ साथ किसानों को मकान भी खाली कराने के निर्देश
जमीन के साथ-साथ किसानों को मकान भी खाली कराने के निर्देश
>कुपिया प्लाट : सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद, अब आशियाने भी छीनेंगे
भास्करन्यूज| पिहोवा
कराहसाहिबके कुपिया प्लाट में पिछले कई सालों से प्रशासन के गले का फांस बनी पंचायती भूमि का मामला फिर से गरमाने लगा है। वहीं कुपिया प्लाट के पट्टेदारों को अब आशियाने भी खाली करने पड़ेंगे। क्योंकि उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी। 350 एकड़ जमीन खाली करने और यहां बने मकान हटवाने के लिए कोर्ट ने पिछले दिनों प्रशासन को आदेश दिए हैं। इससे उन सैकड़ों परिवारों के लिए संकट खड़ा हुआ जो पिछले कई दशकों से इस जमीन पर मकान बनाकर रह रहे हैं। पहले उनकी रोजी रोटी का जरिया और अब आशियाने भी जाने का संकट उन पर है। इस मसले को लेकर पिहोवा-गुहला आबादकार पट्टेदार संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों की बैठक अनाजमंडी के किसान रेस्ट हाऊस में चेयरमैन हरपाल सिंह चीका की अध्यक्षता में हुई। हरपाल सिंह ने कहा कि वे पिछली सरकार के कार्यकाल से अपनी मांग को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकला। लिहाजा वे अपनी इस समस्या को लेकर शीघ्र ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात करेंगे। पट्टेदारों ने कहा कि उनकी रोजी का जरिया जमीन को पहले ही प्रशासन खाली करा पंचायत को सौंप चुका है। पेज3 भी देखें
जबरदस्ती की तो चुप नहीं बैठेंगे
सिंहने बताया कि करीब एक हफ्ता पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने दौरा कर उनसे मकान खाली करने को भी कहा। यदि प्रशासन ने जबरदस्ती की तो गांव में तनाव हो सकता है। लेकिन वे शांति से बातचीत के जरिए समस्या का हल निकालना चाहते हैं। समिति के उपप्रधान कामरेड बावा सिंह, भोला सिंह, कश्मीर सिंह, सतनाम सिंह, मनजीत सिंह, शिव देव सिंह, कामरेड करतार सिंह, कामरेड प्रताप सिंह, डा. साहब सिंह, मखतूल सिंह, बलबीर सिंह, जरनैल सिंह, धर्म सिंह, प्यारा सिंह, जगीर सिंह ने कहा कि पिछली सरकार ने उक्त जमीन उन लोगों को देने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक जमीन खाली है।
आसपासदिला सकता है प्रशासन जमीन
हाईकोर्ट में केस हारने के बाद पुराने पट्टेदारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील डाली गई थी। लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद प्रशासन की ओर से कुपियां प्लाट में रह रहे लोगों के सामने एक प्रस्ताव भी रखा गया कि यदि वे मकान खाली कर दें तो उन्हें गांव के आसपास ही नये मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन दूसरे पक्ष से बात कर मध्यस्थता कर सकता है। लेकिन इसके बदले में उन्हें इस नई जमीन की कीमत देनी होगी। इस प्रस्ताव पर डेरा कुपिया के लोगों ने अपनी राय रखते हुए कहा कि पिछले कई सालों ने उनकी जमीन छीन चुकी है, जिससे उन्हें रोजी रोटी के लाले पड़े हुए हैं। धार्मिक संस्थाओं की मदद से उनका घर चल रहा है। बच्चों की फीस भरने तक को उनके पास पैसे नहीं है। ऐसे में वे अपना मकान छोड़कर दूसरी जगह नहीं खरीद सकते।