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संस्कृत के त्याग से संस्कारों में आई कमी : शास्त्री
>वेदों पर आधारित सेमिनार आयोजित
भास्करन्यूज|पिहोवा
डीएवीकॉलेजमें महर्षि सांदिपणी राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान उज्जैन के तत्वावधान में संस्कृत विभाग की ओर से मंगलवार को वेदों पर सेमीनार आयोजित किया गया। जिसमें आचार्य यज्ञदत्त शास्त्री ने बतौर मुख्यातिथि छात्रों को वेदों संस्कृत के महत्व के बारे में बताया। शास्त्री ने कहा कि संस्कृत से दूर हो जाने पर हम अपनी संस्कृति संस्कारों को लगातार भूलते जा रहे हैं।
पूरे विश्व को मार्ग दिखाने का कार्य वेदों से ही पूरा हुआ था। लेकिन वर्तमान में वेदों से लगातार बढ़ रही दूरी से हमारे युवा कुमार्ग पर चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी संस्कारों के अभाव में गलत मार्ग पर चल कर अपने भविष्य को खराब कर रहे हैं। युवाओं को सदमार्ग पर चलने के लिए संस्कारों का जानना जरूरी है।
विश्वभर ने माना है कि ऋग्वेद विश्व का सबसे महान ग्रंथ है। युवा निराश होकर आत्महत्या जैसे गलत रास्तों का सहारा ले रहे हैं। ऐसे युवकों को यजुर्वेद ग्रंथ में अंकित मंत्रों से भी प्रेरित होना चाहिए और जानना चाहिए कि आत्मघाती व्यक्ति असूर्या लोक को प्राप्त होता है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कामदेव झा संस्कृत प्राध्यापिका प्रो. ऊषा मुरार ने शास्त्री का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वेद के बिना भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं होती। भारतीय संस्कृति का आधार स्तंभ वेद ही हैं। शास्त्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने माता-पिता का सम्मान करें।