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सड़कों से भिंडरावाला के होर्डिंग गायब, प्रशासन को लगने का और उतारने का पता
पिहोवा|अलगाववादी नेतारहे जरनैल सिंह भिंडरावाला खालिस्तान जिंदाबाद के होर्डिंग लगाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। रातों-रात ये होर्डिंग सड़कों से गायब हो गए। सुबह इसका पता चलने पर भिंडरावाला समर्थकों में रोष फैल गया। पहले गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार सभा ने यही सोचा कि शायद प्रशासन ने होर्डिंग उतारे हैं। जिस पर नाराजगी जताने भिंडरावाला समर्थक एसडीएम डॉ. किरण सिंह के पास पहुंचे और उनसे होर्डिंग लगवाने की अनुमति मांगी। वहां पता चला कि उक्त होर्डिंग प्रशासन ने नहीं हटवाए। इसके बाद वे नगरपरिषद पहुंचे, वहां भी होर्डिंग नहीं मिले। जन्मदिन कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही श्री गुरु ग्रंथ साहिब सतकार सभा से जुड़े सतनाम सिंह, कुलवंत सिंह मस्तान सिंह आदि का कहना है कि उनकी नजर में जरनैल सिंह भिंडरावाला संत और कोम के शहीद हैं। वे शांतिपूर्वक तरीके से 12 फरवरी को उनका जन्म दिवस मनाना चाहते हैं। खालिस्तान शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया, क्योंकि इस नारे से भिंडरावाला की पहचान थी। खालिस्तान से उनका मतलब अलगाववाद की मांग नहीं है। संस्था का मकसद केवल अपने संत को श्रद्धांजलि देना है कि कि सामाजिक या देश के माहौल को खराब करना। बता दें कि दो दिन पहले एक संस्था द्वारा पंजाब के अलगाववाद की मांग के जनक रहे जरनैल सिंह भिंडरावाला के होर्डिंग पिहोवा में लगाए गए थे। जिन पर लिखे खालिस्तान जिंदाबाद के नारे से चर्चाओं से माहौल गरम हो गया था।
एनएचपर लगे थे होर्डिंग: वहींजो होर्डिंग लगाए गए हैं वह मेन चौक, ड्रेन पुल शहर के भीड़ भाड़ वाले क्षेत्र में लगाए हैं। जबकि यह पूरा क्षेत्र नेशनल हाइवे नंबर 65 का है। कोर्ट के साफ आदेश हैं कि हाइवे पर किसी भी प्रकार को होर्डिंग नहीं लगाया जा सकता। होर्डिंग लगाने के लिए नगरपालिका या पंचायत द्वारा एक स्थान निर्धारित किया जाता है।