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बेटा खोया तो बना लिया मकसद, नहीं बुझने देंगे कोई चिराग

5 वर्ष पहले
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पिपलीनिवासी हरीश कुमार पुरी ने मई 1994 में एक सड़क हादसे में अपना बेटा खोया तो ठान लिया कि अब वे किसी भी घर का चिराग नहीं बुझने देंगे। इस मकसद के लिए वे 22 साल से संघर्ष कर रहे हैं।

उन्हें इस लक्ष्य से तो कैंसर की बीमारी डिगा पाई और ही 80 साल की उम्र। आज इन्हीं के प्रयासों सकें से जीटी रोड पर ट्रैफिक और हाईवे पेट्रोल पोस्ट बने। इसके अलावा ट्रैफिक, रोड, ट्रांसपोर्ट और अस्पतालों में जीवनरक्षक उपकरणों की खामियों को दूर कराया। वे बताते हैं कि अप्रैल 94 में अमृतसर से कस्टम ऑफिसर के पद से रिटायर हुए थे। एक माह बाद 14 मई को पीएफ और पेंशन के बारे में पता करने अमृतसर गए थे। इस बीच पता चला कि पिपली लालबत्ती चौक पर सड़क हादसे में बेटे अशोक की मौत हो गई। अशोक स्कूटर पर लालबत्ती के ग्रीन होने का इंतजार कर रहा था। इतने में रोडवेज चालक ने लालबत्ती जंप करते हुए ट्रक को टक्कर मारी थी। इसके बाद ट्रक ने स्कूटर को चपेट में ले लिया। करीब एक घंटे तक अशोक ट्रक के नीचे ही रहा। जब निकाला तो सांस चल रहे थे। लेकिन व्यवस्था नहीं होने के कारण प्राइवेट कार से पीजीआई ले जाना पड़ा। जहां रास्ते में बेटे ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने हरीश पुरी के जीवन का मकसद ही बदल दिया। बनाई22 जगह पर पोस्ट : इसीयाचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के आदेश जीटी रोड पर 22 जगह ट्रैफिक ऐड पोस्ट बनाई। जहां एंबुलेंस और क्रेन जैसी सुविधाएं हुई। उन स्थानों को चिह्नित किया। वहां बचाव संबंधित उपाय किए। पूर्व डीजीपी रांजीव दलाल के समय में सभी जरूरी जगहों पर सिग्नल की व्यवस्था की। पुरी बताते हैं कि वे कैंसर से पीड़ित है। अभी खामियां दूर नहीं हुई। आज भी हाईकोर्ट में पीएल डली हुई है। जब तक सांस है वे खामियों को दूर कराने में जुटे रहेंगे। उनकी अब तक 14 बार कीमोथैरेपी हो चुकी है।

नहीं हुई सुनवाई तो चार साल बाद पहुंचे हाईकोर्ट

जबसरकार की तरफ से कुछ नहीं हुआ तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 1998 में जनहित याचिका दायर की। इसमें सरकार, पुलिस, पीडब्ल्यूडी, स्वास्थ्य विभाग को भी पार्टी बनाया। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार की। इस बीच पुरी ने जानकारियां भी जुटाई। बसों में स्पीड गवर्नर नहीं थे। बताते हैं कि जब हाईकोर्ट ने रोडवेज से जवाब मांगा तो बताया कि एक्सीलेटर के नीचे नट होता है। इससे स्पीड कंट्रोल रहती है। जबकि होना मेकेनिकल स्पीड गवर्नर चाहिए था। नट तो चालक खोल कर स्पीड बढ़ा सकता था। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार को मेकेनिकल स्पीड गवर्नर लगाने के आदेश दिए।

हरीश कुमार पुरी।

जीटी रोड पर जहां हादसा हुआ, वहां पुलिस पोस्ट थी। एक पैरामेडिकल स्टाफ था। लेकिन उसकी डयूटी पुलिस लाइन में थी। क्रेन और ही एंबुलेंस थी। इसके बाद हरीश ने पहले अंबाला से लेकर सोनीपत तक पैदल ही घूम सर्वे किया, जिससे कि इमरजेंसी में पीडि़त को राहत मिल सके। ताज्जुब की बात है कि कई जगह पोस्ट तो थी पर सुविधाएं नहीं मिली।

पूर्वसीएम ने दिए आदेश तो गुम गई फाइल : इसपर तत्कालीन सीएम बंसी लाल से मिलकर पुलिस पोस्ट पर एंबुलेंस, क्रेन, फ़र्स्ट एड, पैरामेडिकल स्टाफ जैसी सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की। पूर्व सीएम ने भी तुरंत ये व्यवस्था करने का आश्वासन देते हुए संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए, लेकिन फाइल एक से दूसरे दफ्तर तक अटकती रही।

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