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ठप पड़ा सीवरेज सिस्टम बेकार गए करोड़ रुपए
अनाजमंडीपिपली में सीवरेज सिस्टम पर करोड़ों रुपए खर्चे गए। लेकिन करोड़ों की लागत से तैयार सीवरेज प्लांट बंद पड़ा है। जबकि इस प्लांट को लगे करीब दो वर्ष ही हुए हैं। प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी की निकासी ठप हो गई है। इससे अधिकारियों द्वारा सीवरेज को चालू कराने की बजाय प्लांट से निकलने वाले इस दूषित पानी को मंडी के पीछे खुले मैदान में छोड़ दिया गया है।
इससे केवल बीमारियां फैलने का खतरा है बल्कि वातावरण भी दूषित हो रहा है। मंडी प्रधान नरेंद्र पाल झांब, महासचिव धर्मपाल मथाना, समाजसेवी सुरेंद्र ढींगड़ा आदि व्यापारियों का आरोप है कि जब दूषित पानी की निकासी के लिए सीवरेज बनाई गई थी तो यह वर्ष भर में ही बंद क्यों हो गई।
जांचकर बंद करवा देंगे पानी : जबइस बारे में मार्केटिंग बोर्ड के एक्सईएन महिंद्र सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। कहा कि यदि थोड़ा बहुत पानी कहीं छोड़ा है, तो वे देखेंगे।
कहां से आता है प्लांट में दूषित पानी
बतायाजाता है कि पिपली मंडी की पूरी सीवरेज का दूषित पानी इस प्लांट में इकट्ठा कर फिल्टर किया जाता है। उसके बाद सीवरेज के जरिए इसे सरस्वती ड्रेन में छोड़ा जाता है। इस सीवरेज व्यवस्था पर करीब एक करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है। इसके बावजूद इस प्लांट से निकलने वाले दूषित पानी से सीवरेज बंद होना सवालों के घेरे में है। सवाल उठता है कि खुले में दूषित पानी किसके आदेशों पर छोड़ा गया। यदि सीवरेज बंद थी तो उसको चालू क्यों नहीं कराया गया। यदि खुले में पानी छोड़ना था तो दूषित पानी की निकासी के लिए सीवरेज पर इतनी राशि क्यों खर्च की गई। यह जांच का विषय है।
फिर न्यायालय का रूख करेंंगे सुरेंद्र
समाजसेवी एवं व्यापारी सुरेंद्र ढींगड़ा ने बताया है कि उन्होंने खुले मैदान में छोड़े गए दूषित को बंद कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें संबंधित विभाग के अधिकारियों को पानी बंद करने के आदेश दिए थे। लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। वे ऐसे अधिकारियों के खिलाफ फिर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे, ताकि मंडी के पीछे खुले में छोड़े गए दूषित पानी को बंद किया जा सके।
मंडी में लगे सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट से खुले मैदान में जाता दूषित पानी
पिपली|मंडी में लगा सीवरेज ट्रीटमैंट प्लांट।