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किसान यूनियन को मनाने में छूटे अधिकारियों के पसीने

7 वर्ष पहले
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पिपली। बारीक धान के सही दाम मिलने के विरोध में भाकियू ने पिपली अनाज मंडी में महापंचायत बुलाई। जिसमें सभी किसानों ने बैठक कर सड़क जाम करने का फैसला लिया। जिससे जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने की कोशिश की। लेकिन किसान नहीं माने और सड़क जाम के लिए निकल पड़े। जैसे ही किसान सड़क पर पहुंचे तो प्रशासनिक अधिकारियों ने हैफेड के एमडी से बातचीत कराने का आश्वासन दिया। जिसपर किसान सहमत हो गए और जाम लगाने का फैसला टाल दिया।

विधानसभा चुनाव के दौरान लगी आचार संहिता में इस तरह का विरोध प्रदर्शन प्रशासन के लिए कई मुश्किलें खड़ी कर सकता था। प्रदर्शन का नेतृत्व भाकियू के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने किया। इस तरह ऐन मौके पर जिला प्रशासन ने सूझबूझ से काम लेकर जाम लगाने पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों को रोकने में सफलता हासिल की।
किसानों का आरोप है कि व्यापारी आपसी मिलीभगत कर किसानों को ठग रहे हैं। बारीक धान को कोढ़ियों के भाव खरीद रहे हैं। जबकि पिछले साल 1509 किस्म की धान 4,000 से 4,500 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी थी। लेकिन अबकी बार इसी धान को व्यापारी 2,200 रुपए से 3,000 रुपए प्रति क्विंटल खरीद रहे हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के दामों में आज भी पूरी तेजी है।
भाकियू द्वारा कड़ा रूख अपनाते ही मौके पर जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम विनय प्रताप सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक अहलावत, बीडीपीओ राजबीर, डीएसपी सतीश गौतम, एसएचओ सदर विजय मलिक, एसएचओ सिटी रामकुमार सहित भारी संख्या पुलिस बल मौजूद था।
सिरे नहीं चढ़ सकी बातचीत : दोपहर के समय प्रशासनिक अधिकारियों ने भाकियू नेता के साथ बातचीत की। लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ सकी। कमरे से बाहर आते ही चढूनी ने प्रशासन को अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि यदि साढ़े तीन बजे तक प्रशासन ने उनकी मांगों को नहीं माना तो वे सड़क पर जाम लगाने के साथ-साथ जेल जाने में भी गुरेज नहीं करेंगे।
ये थी किसानों की मांगें : भाकियू ने प्रशासन के माध्यम से सरकार से धान की सरकारी खरीद तुरंत करने की मांग करने साथ 1509 किस्म की धान की खरीद में हैफेड की खरीद शुरू कराने की मांग की। लेकिन मामला प्रदेश स्तर का होने के कारण प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले का मुख्य सचिव एमडी हैफेड से बात करने के बाद सुलझाने का आश्वासन दिया।
(पिपली| किसानों को संबोधित करते गुरनाम सिंह। )