माघ स्नान के प्रभाव से कई जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं : सुरेश
फतेहपुर-पूंडरीमेंचल रहे श्री गायत्री-महायज्ञ में शनिवार को मुख्य यजमान के रूप में संदीप मंगल ने प|ी सहित रणबीर सिंह ने भाग लिया। यज्ञ के पुजारी पंडित सुरेश कुमार भारद्वाज ने माघ स्नान के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि गंधर्व कन्याओं और वेदनिधि के पुत्र आग्रेय जो श्राप के प्रभाव से पिशाच योनि को प्राप्त हो गए थे। उनकी मुक्ति के बारे में बताते हुए महर्षि लोमेश ने बताया कि यदि ये उनके साथ चलकर प्रयाग राज में माघ स्नान करें तो इन्हें मुक्ति जरूर मिल जाएगी। पाप श्राप की शांति माघ मास में तीर्थ पर जाकर स्नान करने से ही होती है। माघ स्नान के प्रभाव से सात जन्मों तक के पाप नष्ट हो जाते हैं।
विभिन्न नदियों तीर्थों में स्नान का माहात्म्य बतलाते हुए महर्षि लोमेश ने कहा कि सरयू, गंडकी, चंद्रभावण, महानदी, स्वर्गभद्रा, कृष्णा, कावेरी, सरस्वती, ताप्ति , गोदावरी, पयोष्णी, कृष्णवेणिका तुंगभद्रा महानदियों में स्नान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है। नैमिषारण तीर्थ स्नान करने से विष्णु भगवान का सानिध्य मिलता है। तीर्थराज पुष्कर में माघ स्नान करने से ब्रह्मा का सामीप्य प्राप्त होता है। कुरुक्षेत्र में माघ स्नान करने से इंद्र लोक प्राप्त होता है। देव सरोवर में माघ स्नान करने से इंद्र लोक प्राप्त होता है। देव सरोवर में योग सिद्ध का फल, देवकी में स्नान करने से मनुष्य को देवशरीर, गोमती में स्नान से पुनर्जन्म नहीं होता, महाकाल, ओंकारेश्वर, अमरेश्वर, नीलकंठ, अबुर्द हेमकूट में स्नान करने से ऐश्वर्य सहित रूद्रलोक प्राप्त होता है। प्रयाग में माघ मास में मात्र तीन दिन स्नान करने से महापापी भी मुक्ति पा जाते हैं।
पूंडरी| माघमहात्मय के बारे में प्रवचन करते हुए पंडित भारद्वाज।
शिव करते सभी जीवों का कल्याण : ऋषिकेश
सीवन|दिव्यज्योतिजागृति संस्थान की और से स्वर्ग द्वार मंदिर सीवन में चार दिवसीय शिव कथा आयोजन किया गया। दूसरे दिन की कथा का शुभारंभ स्वर्गद्वार मंदिर कमेटी के प्रधान ऋषिकेश शर्मा अन्य सदस्यों ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। सर्व आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी प्रेमा भारती ने कहा कि किस प्रकार से भगवान शिव सभी का कल्याण करने वाले हैं। चाहे उनकी शरण में कोई भी आए उसी का उद्धार करते हैं। सती के जीवन के विषय में कहा कि सती ने परमात्मा पर संशय किया। क्योंकि सती परमात्मा को बुद्धि से समझने का प्रयास कर रही थी। हमारे शास्त्र कहते हैं कि परमात्मा बुद्धि से जानने का विषय नहीं है। परमात्मा को बुद्धि से नहीं जाना जा सकता। जिसने भी आज तक परमात्मा को बुद्धि से जानने का प्रयास किया है वह उस परमेश्वर को प्राप्त नहीं कर सका। परमात्मा को जानने की लिए दिव्य दृष्टि की आवश्यकता है। इसके माध्यम से हम परमात्मा को अपने घर में देख सकते हैं। हमें दिव्य दृष्टि की आवश्यकता है उसे जानने के लिए और जब तक हम पूर्ण गुरु संत की शरण में नहीं जाते तब दिव्य दृष्टि को प्राप्त नहीं कर सकते। कार्यक्रम के आयोजन में करनैल सिंह, जगीर सिंह अमरीक सिंह, बलकार सिंह, राजेंद्र, साहिब सिंह अन्य सेवादारों ने सहयोग किया।
सीवन| साध्वीसत प्रेमा भारती प्रवचन करते हुए।