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एचआरए के नाम हो रही लूट की जांच की जाए : रणदीप आर्य
भारतीयकिसानसंघ के प्रवक्ता रणदीप आर्य ने कहा कि विभिन्न विभागों के सरकारी कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में वेतन भोगी की भूमिका निभा रहे हैं और बड़े शहरों में रह रहे हैं।
पत्रकारों से बातचीत में आर्य ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा सेवाओं अन्य प्रशासनिक सेवाओं में कार्यरत कर्मचारी अधिकारी एचआरए प्राप्त कर रहे हैं। जबकि वे इन क्षेत्रों में रहने की बजाए बड़े शहरों में रह रहे हैं। उन्होंने एचआरए प्राप्त करने के लिए फर्जी पते दिए हैं। जोकि बहुत बड़ा घोटाला है। पहले भी इस बारे में कालेज प्राध्यापकों के कई मामले सामने आए और विभाग ने कार्रवाई करते हुए एचआरए भी बंद किए। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के अंदर एचआरए के नाम पर बहुत बड़ा घोटाला है जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। आर्य ने कहा कि वे इस बारे में विभागीय सचिव स्तर के अधिकारियों से लेकर पिछली सरकार के मंत्रियों से लेकर विधायकों तक को अवगत करवा चुके थे। अब भी उन्होंने विधायकों से लेकर मुख्यमंत्री तक को भी अवगत करवाया है कि इस घोटाले की जांच करवा इस पर पाबंदी लगाई जाए और ग्रामीण में सरकारी सेवाओं के अस्तित्व को बचाया जाए।
पंजाबसिविल सर्विस रूल को लागू कराया जाए : आर्यने कहा कि एचआरए के लिए पंजाब सिविल सर्विस रूल बनाया गया गया था। जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी अधिकारी को रहने के लिए एचआरए भी दिया जाता है। जिसका दुरुपयोग करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में सर्विस करने वाले कर्मचारी अधिकारी रहते अपने घर है और उस क्षेत्र के फर्जी पते देकर सरकार को एचआरए के नाम पर चूना लगा रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कर्मचारियों अधिकारियों को अपने घर के पते की किसी भी रसीद पर हस्ताक्षर करके दें।