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400 साल के ऐतिहासिक मेले में पहलवानों ने दिखाए दांव पेंच

7 वर्ष पहले
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रादौर|आठ दिवसीयजाहरवीर गोगा माड़ी मेले में श्रद्धालुओं ने गोगा माड़ी की मजार पर माथा टेका और प्रसाद चढ़ाया। मेेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस कर्मचारी तैनात किए गए। मेेले में हो रहे दंगल में पहलवानों ने कुश्ती के जौहर दिए। गोगा माड़ी का मेला सभी धर्मों की एकता का प्रतीक है।

रादौर का मेला 400 वर्ष से अधिक पुराना हैं। मुगलों के शासनकाल से आयोजित होता रहा हैं। अंग्रेजों ने 1930 में कुछ वर्षों के लिए रादौर के मेले को बंद करवा दिया था। अंग्रेजों का मानना था कि रादौर मेले के दौरान हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख देश की आजादी को लेकर आपस में चर्चा करते हैं। जिससे अंग्रेजों को रादौर क्षेत्र में विद्रोह होने की आशंका लगी रहती थी। इन सब बातों को लेकर अंग्रेजों ने कुछ वर्षों के लिये रादौर के मेले पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन बाद में जनता के विरोध को देखते हुए अंग्रेजों ने पुन मेला आयोजित करने की इजाजत दे दी थी। जिसके बाद से लगातार मेले का आयोजन होता रहा हैं। मेले में महिलाओं बच्चों ने खूब खरीददारी की। मेले में मिक्की माउस, मौत का कु आं झूलों को श्रद्धालुओं ने भरपूर आनंद उठाया। वहीं मेले में लगाए मौत के कुएं के मालिक अनुराग राणा, सलमा पठान ने बताया कि वह वर्षों से मेले में अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों का खूब मनोरंजन कर रहे हैं। मेले में लग रहे झूलों में बैठ कर बच्चों ने खूब आनंद उठाया। दिल्ली से आए अब्दुल, आलम, आफताब ने बताया कि ड्रैगन ट्रेन ने भी बच्चों को मन मोह लिया।