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वेदों में स्त्री मातृ देव के समान: महेशाश्रम

7 वर्ष पहले
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श्रीमद्भागवतकथा का आयोजन शनिवार को नागेश्वर धाम पक्का घाट पर किया गया। इस दौरान मंदिर में सैकड़ों महिलाएं पुरुष श्रीमद् भागवत कथा सुनने पहुंचे। भक्तों का प्रवचन करते हुए स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा वेद में स्त्री को मातृदेव की संज्ञा दिया गया है। परंतु आज समाज में सबसे ज्यादा अत्याचार नारियों पर हो रहा है। दहेज के लोभियों द्वारा जगह-जगह स्त्रियों को प्रताड़ित किया जा रहा है। काम के हवस में पड़ कर आज का मनुष्य बहन बेटियों का भी चरित्र हनन करने पर भी उतर गया है। भगवान कृष्ण भगवान राम के द्वारा नारी जाति को भी सम्पूर्ण सम्मान दिया गया। जहां राम के ताड़का जैसी राक्षसी को मातृ पद प्रदान कर मुक्त कर दिया वहीं भगवान श्री कृष्ण ने बृज के प्रत्येक गोपी को शक्ति का स्वरूप मानकर संपूर्ण प्रतिष्ठा प्रदान की महारास में भगवान कृष्ण ने स्वयं श्री राधिका से कहा है राधे मैं अपने अवतार लीला में जो कुछ भी करता हूं। वो तुम्हारे कृपा का ही प्रसाद है। इस अवसर पर पं. ज्ञानप्रकाश शर्मा, विजय शर्मा, सुरेश शर्मा खजूरी, शशि, कौशल, बाला, मीनाक्षी, पं. नवनीत शर्मा, पं. जितेंद्र शर्मा, धनंजय मिश्रा ने भाग लिया।