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आज चंद्रघंटा माता की होगी पूजा : राम भगत
आचार्यपंडित राम भगत हरितस ने बताया कि नवरात्रा शब्द का अर्थ है नव रात्रि प्रतिपदा से नवमी तक नवरात्रा कहलाता है। श्रीमद् देवी भागवत अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रे होते हैं। जिनमें चैत्र, आषाढ़, माघ, अश्विन आदि मास लिए गए हैं। चैत्र, आषाढ़, ग्रीष्म कालीन नवरात्रे तथा माघ, अश्विन शरदकालीन नवरात्रे के नाम से विख्यात है।
आदि-शक्ति भवानी का स्मरण मुख्य काल नवरात्रा है। जिसमें भक्तजन व्रत, कन्या पूजन, दुर्गा सप्तशती पाठ, सहस्त्र चंडी, लख चंडी, आयूष चंडी आदि यज्ञ करके अपने मनोरथ पूर्ण करते हैं। पंडित राम भगत हरित ने बताया कि ग्रीष्म नवरात्रे ग्रीष्म ऋतु का सूचक है, इसी तरह शरद् नवरात्रे शरद ऋतु का सूचक है। चैत्र, ग्रीष्म ऋतु, अश्विन प्रकट नवरात्रे है। आषाढ़ माघ गुप्त नवरात्रे कहलाते हैं। आचार्य ने बताया कि नौ के अंक की संख्या सबसे बड़ी संख्या है। नौ अंक अपने आप में पूर्ण है। सनातन आदि काल से नवरात्रे पूजा चली रही है। हर समय में पूजा करने की पद्धति अलग हो सकती है। वह आध शक्ति की उपासना ही है। हिंदु संस्कृति में मातृ स्थान प्रथम है। वंदे भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नम स्तस्ये नमस्तस्ये नमो नम:। यह उस मातृ शक्ति की उपासना है जो राम कृष्ण परमहंस के अंग संग थी। शिवाजी, महाराणाओं, रण-वांकुरों गुरु गोविंद सिंह ने चंडी रूप की पूजा की इन्हीं नवरात्रों में अमिट वरदान प्राप्त किया। आचार्य ने बताया कि नवरात्रे दो अक्टूबर को समापन होंगे। मंदिरों में तीसरे नवरात्रे पर चंद्र घटा मां की पूजा की। नवरात्रों पर मंदिरों में चहल पहल रही, मां के जयकारों के जय घोष से मंदिर का वातावरण भक्तिमय में तबदील हो गया।